ज़ोर ज़ुल्मत बेनियाज़ी हर बला आबाद है।
यूं समझिये शह्र का रहबर ही अब सय्याद है।
हर बुलंदी बक्श देता है ख़ुदा उस शख़्स को।
जो अना की क़ैद से पूरी तरह आज़ाद है।
इक मुसलसल इम्तिहां है ज़िन्दगी का सिलसिला।
फ़लसफ़ा-ए-ज़िन्दगी तो ज़िन्दगी के बाद है।
इसलिये हमने भुला दी है जहां से दुश्मनी।
आप भी सब भूल जाओगे अभी जो याद है।
गर्दिश ए उल्फ़त है मेरा लुत्फ़ ए रगबत दोस्तों।
कौन कहता है कि राजू इश्क़ में बर्बाद है
राजीव कुमार
यूं समझिये शह्र का रहबर ही अब सय्याद है।
हर बुलंदी बक्श देता है ख़ुदा उस शख़्स को।
जो अना की क़ैद से पूरी तरह आज़ाद है।
इक मुसलसल इम्तिहां है ज़िन्दगी का सिलसिला।
फ़लसफ़ा-ए-ज़िन्दगी तो ज़िन्दगी के बाद है।
इसलिये हमने भुला दी है जहां से दुश्मनी।
आप भी सब भूल जाओगे अभी जो याद है।
गर्दिश ए उल्फ़त है मेरा लुत्फ़ ए रगबत दोस्तों।
कौन कहता है कि राजू इश्क़ में बर्बाद है
राजीव कुमार

