ग़ज़ल
भूखें हैं लोग इनके निवाले कहां गये।
ऐसे सवाल पूछने वाले कहां गये।
सब ठीक हो गया तो बदन कह के रो पङा।
सीने के ज़ख्म पांव के छाले कहां गये ।
अब तक जो तीरगी के मुक़ाबिल रहे यहाँ
जाने वो रोशनी के रिसाले कहाँ गये
सच लिखने बोलने की रवायत को छोङ कर।
अपने कलम के सच्चे जियाले कहाँ गये।
हावी हैं नफरतों का अंधेरा दिलों पे क्युं।
दिल से महब्बतों के उजाले कहां गये।
राजीव कुमार
जियाले- brave
रासाले -squad of soldiers
भूखें हैं लोग इनके निवाले कहां गये।
ऐसे सवाल पूछने वाले कहां गये।
सब ठीक हो गया तो बदन कह के रो पङा।
सीने के ज़ख्म पांव के छाले कहां गये ।
अब तक जो तीरगी के मुक़ाबिल रहे यहाँ
जाने वो रोशनी के रिसाले कहाँ गये
सच लिखने बोलने की रवायत को छोङ कर।
अपने कलम के सच्चे जियाले कहाँ गये।
हावी हैं नफरतों का अंधेरा दिलों पे क्युं।
दिल से महब्बतों के उजाले कहां गये।
राजीव कुमार
जियाले- brave
रासाले -squad of soldiers
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