ग़ज़ल
सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।
आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे
जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी
मोहन के साथ ख़्वाब में राधा दिखाई दे
शाइर की आह ठीक है पर शेर है वही
कागज पे हर्फ-हर्फ तङपता दिखाई दे
बीनाई को मेरी ये असर दे मेरे खुदा
जब भी खुले ये आंख सवेरा दिखाई दे
दावा हर एक आप का मानेंगे हम मगर
पूरा कोई तो आप का वादा दिखाई दे
मजबूर कर रहा है ज़माना हमें की हम
सच्चा कहें उसी को जो झूठा दिखाई दे
राजीव कुमार
सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।
आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे
जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी
मोहन के साथ ख़्वाब में राधा दिखाई दे
शाइर की आह ठीक है पर शेर है वही
कागज पे हर्फ-हर्फ तङपता दिखाई दे
बीनाई को मेरी ये असर दे मेरे खुदा
जब भी खुले ये आंख सवेरा दिखाई दे
दावा हर एक आप का मानेंगे हम मगर
पूरा कोई तो आप का वादा दिखाई दे
मजबूर कर रहा है ज़माना हमें की हम
सच्चा कहें उसी को जो झूठा दिखाई दे
राजीव कुमार
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