Tuesday, October 2, 2018

सबकी हंसी ख़ुशी की दुवा करते रहेंगे।

ग़ज़ल

सबकी हंसी ख़ुशी की दुवा करते रहेंगे।
हम फ़र्ज दोस्ती का अदा करते रहेंगे।

जिस तरह वफ़ा तुमने निभाई है जाने जा
थोङा बहुत तो हम भी दगा करते रहेंगे।

मरने के बाद कौन सुनेगा मलामतें।
हम भी कोई न कोई खता करते रहेंगे।

चाहत वफायें दीन धरम और आशिकी।
हर इक ज़ह्र का हम भी नशा करते रहेंगे।

जिद्दी था बहुत मानता नहीं था मर गया।
कहता था महब्बत तो चचा करते रहेंगे।

घर बार काम धाम दोस्त और शाइरी
सब रोल ज़िन्दगी में अदा करते रहेंगे।

राजीव कुमार

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