Sunday, May 20, 2018

दिन रात गजल शेर रुबाई का फैसला

अनमोल साहब की जमीन पर 😍

दिन रात गजल शेर रुबाई का फैसला
हम कर रहे हैं दिल की दवाई का फैसला

वो सब हसीन ख्वाब जो आंखो में कैद थे
अब कर लिया है उनकी रिहाई का फैसला

फैशन में बेलिबास शह्र देख कर हमें।
लेना पड़ा अदब से विदाई का फैसला।

बस्ती में जो मकान जले बन ही  जायेंगे ।
लेकिन हो खत्म पहले लड़ाई का फैसला

ई मेल फोन काल अजी कुछ तो कीजिये।
या कर लिया है हमसे जुदाई का फैसला

जिसका भला हुआ है वो ये फैसला करे ।
किसने किया था किसकी भलाई का फैसला ।

पढ़ लिख के भी लहू ही बहाना है तो हमें ।
मंजूर नहीं ऐसी पढ़ाई का फैसला।

राजीव कुमार

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