फ़िलबदीह ग़ज़ल
दिल की गहराइयों में जाना है।
फ़िक्र का दायरा बड़ाना है।
धूप झुलसायेगी बदन लेकिन।
ओस को धूप में नहाना है
साँस दर साँस है कहानी जो।
मौत के बाद वो फ़साना है
दिल के दरिया के इक तलातुम में।
प्यार को डूब कर ही पाना है
आपको अक़्ल क्यूँ नहीं आती
आप से तंग ये ज़माना है।
जिनकी बीनाई छीन ली उनको
रोज इक ख़्वाब भी दिखाना है
एक ही शर्त है मुहब्बत की।
चोट खा कर भी मुस्कुराना है।
ज़िन्दगी क्या है कुछ नहीं भाई
जिस्म को आग में जलाना है
आप जैसा महल नहीं लेकिन
इक मेरा भी ग़रीबख़ाना है
बज़्म-ए-चाहत का आसमां देखो
चाँद-तारों का शामियाना है ।
चाँद को देख कर समझ आया
आसमां पर तेरा ठिकाना है
मेरे आँगन में पेड़ बरगद का
कितनी चिड़ियों का आशियाना है
मेरे क़िस्से में तेरे क़िस्से सा
इक दिवानी है इक दिवाना है
शाइरी और कुछ नहीं यारों
ये हकीकत है या फ़साना है
राजीव कुमार
दिल की गहराइयों में जाना है।
फ़िक्र का दायरा बड़ाना है।
धूप झुलसायेगी बदन लेकिन।
ओस को धूप में नहाना है
साँस दर साँस है कहानी जो।
मौत के बाद वो फ़साना है
दिल के दरिया के इक तलातुम में।
प्यार को डूब कर ही पाना है
आपको अक़्ल क्यूँ नहीं आती
आप से तंग ये ज़माना है।
जिनकी बीनाई छीन ली उनको
रोज इक ख़्वाब भी दिखाना है
एक ही शर्त है मुहब्बत की।
चोट खा कर भी मुस्कुराना है।
ज़िन्दगी क्या है कुछ नहीं भाई
जिस्म को आग में जलाना है
आप जैसा महल नहीं लेकिन
इक मेरा भी ग़रीबख़ाना है
बज़्म-ए-चाहत का आसमां देखो
चाँद-तारों का शामियाना है ।
चाँद को देख कर समझ आया
आसमां पर तेरा ठिकाना है
मेरे आँगन में पेड़ बरगद का
कितनी चिड़ियों का आशियाना है
मेरे क़िस्से में तेरे क़िस्से सा
इक दिवानी है इक दिवाना है
शाइरी और कुछ नहीं यारों
ये हकीकत है या फ़साना है
राजीव कुमार
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