भोजपूरी ग़ज़ल 💕
दर्द भीतर से आये लागल बा।
आह दिल के सुनाये लागल बा
हमके लागता आज कल हमके।
केहू हमसे चुराये लागल बा।
प्यार कइनी त जान गइनी हम।
केहू हमके सताये लागल बा ।
गांव के छोड़ देहनी हम लेकिन।
गांव हमके बुलाये लागल बा।
बात दिल के रोकात नइखे अब।
बात मूहे ले आये लागल बा।
रात तोहरा के देख के बिहने।
ईद सभे मनाये लागल बा।
राजीव कुमार
दर्द भीतर से आये लागल बा।
आह दिल के सुनाये लागल बा
हमके लागता आज कल हमके।
केहू हमसे चुराये लागल बा।
प्यार कइनी त जान गइनी हम।
केहू हमके सताये लागल बा ।
गांव के छोड़ देहनी हम लेकिन।
गांव हमके बुलाये लागल बा।
बात दिल के रोकात नइखे अब।
बात मूहे ले आये लागल बा।
रात तोहरा के देख के बिहने।
ईद सभे मनाये लागल बा।
राजीव कुमार
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