Tuesday, August 28, 2018

जाहिल है नामुराद है शौकीन भी है दिल।

ग़ज़ल

जाहिल है नामुराद है शौकीन भी है दिल।
यानी कि हर हिसाब से रंगीन भी है दिल।

तुझसे बिछङ के आज भी ज़िन्दा हूं किस तरह
जाना इसी ख़याल से गमगीन भी है दिल।

पहले था पुरखुलूश  मगर आशिकी के बाद ।
वहसी है बद मिज़ाज है बे- दीन भी है दिल ।

यूं तो हर इक लिहाज से कङवी है जिन्दगी
लेकिन किसी की याद से नमकीन भी है दिल

अब दौरे आशिकी में शबे हिज्र के लिये
बिस्तर है इक किताब है माजीन भी है दिल

इसके लिये नहीं हैं ये दुनिया के कायदे।
मुल्जिम है खुद गवाह है आईन भी है दिल।

किस चीज से बना है कोई जानता है क्या।
आतिश है ज़ाफ़रान है संगीन भी है दिल

राजीव कुमार

माजीन- गर्म कम्बल
आईन- संविधान कानून
ज़ाफ़रान- केसर।
आतिश - अग्नि
संगीन- पत्थर का बना

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