Saturday, August 4, 2018

तुम्हारे रुख का ये चिलमन जरूर महकेगा।


तुम्हारे रुख का ये चिलमन जरूर महकेगा।
खिलेंगे फूल तो गुलशन जरूर महकेगा

बहुत ही प्यार से पहना रहे है हम देखो।
तुम्हारे हाथ में कंगन जरूर महकेगा।

हमारे सामने बे नूर  लग रहा है पर।
तुम्हारे सामने दरपन जरूर महकेगा।

ये सोच कर ही अना हमने छोङ दी यारों।
हमारे नाम  से दुश्मन जरूर महकेगा।

है इक बुजूर्ग की कुर्सी औ नीम की छाया
हमारे घर का भी आंगन जरूर महकेगा।

वो अपने यार वो बारिस वो शायरी अपनी
हां अबके बार भी सावन जरूर महकेगा।

राजीव कुमार

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