Tuesday, October 23, 2018

ये जो हर रोज़ पल पल देखते हो

हज़ल

ये जो हर रोज़ पल पल देखते हो
बताओ क्यूँ मुसलसल देखते हो।🤔

मैं हर दिन प्राईम टाईम देखता हूँ।
मगर तुम लोग दंगल देखते हो 🤔

फ़क़त हिन्दू मुसलमां ही करोगे।
अगर तुम न्यूज़ चैनल देखते हो 🤔

मियां जम्हूरियत के नाम पर तुम
अबे क्यूँ रोज दलदल देखते हो ।😂

तुम्हे चेहरे की रंगत चाहिये थी
सो तुम चेहरा ही केवल देखते हो।😐

वही क्या अब भी भाषण दे रहा है।
जिसे तुम होके पागल देखते हो।😎

राजीव कुमार

No comments:

Post a Comment

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...