फिलबदीह ग़ज़ल
फिक्र को इख्तियार मिल जाये।
हमको उनका दयार मिल जाये।
दिल की दुनिया तबाह भी कर ली।
दिल को शायद करार मिल जाये।
मेरी चाहत की तर्जुमानी को।
इक हसीं कोहसार मिल जाये।
जंग जारी है आज तक खुद से।
खुद पे अब इख्तेयार मिल जाये
चांद तारों से हमको क्या लेना।
इनसे बेहतर है यार मिल जाये।
दर्द बे शक हजार मिल जायें।
राजीव कुमार
फिक्र को इख्तियार मिल जाये।
हमको उनका दयार मिल जाये।
दिल की दुनिया तबाह भी कर ली।
दिल को शायद करार मिल जाये।
मेरी चाहत की तर्जुमानी को।
इक हसीं कोहसार मिल जाये।
जंग जारी है आज तक खुद से।
खुद पे अब इख्तेयार मिल जाये
चांद तारों से हमको क्या लेना।
इनसे बेहतर है यार मिल जाये।
दर्द बे शक हजार मिल जायें।
- फिर भी ख्वाहिश है प्यार मिल जाये
राजीव कुमार
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