बनाके शाम को हम भी गुलाब देखते हैं
हटाओ अश्क की बातें शराब देखते हैं
अब अपना जख्म किसी को नहीं दिखायेगे
ये सारे लोग हमी को खराब देखते हैं
हम ही को सारे ज़माने की फ़िक्र है वर्ना
सुना है लोग बस अपना हिसाब देखते हैं
सियासी लोग हमारे दिनों को बदलेंगे।
हम आप दिन में मुंगेरी का ख्वाब देखते हैं
वो जिनके ख्वाब उन्हे सोने तक नहीं देते
उन्हीं को लोग यहां कामयाब देखते हैं
ये जान कर भी वही शक्स एक कातिल है
उसी में लोग मगर इन्तेखाब देखते हैं
इसी लिये तो मुकद्दर से वास्ता तोङा
हम अपने दम पे ही अपना जवाब देखते है।
राजीव कुमार
हटाओ अश्क की बातें शराब देखते हैं
अब अपना जख्म किसी को नहीं दिखायेगे
ये सारे लोग हमी को खराब देखते हैं
हम ही को सारे ज़माने की फ़िक्र है वर्ना
सुना है लोग बस अपना हिसाब देखते हैं
सियासी लोग हमारे दिनों को बदलेंगे।
हम आप दिन में मुंगेरी का ख्वाब देखते हैं
वो जिनके ख्वाब उन्हे सोने तक नहीं देते
उन्हीं को लोग यहां कामयाब देखते हैं
ये जान कर भी वही शक्स एक कातिल है
उसी में लोग मगर इन्तेखाब देखते हैं
इसी लिये तो मुकद्दर से वास्ता तोङा
हम अपने दम पे ही अपना जवाब देखते है।
राजीव कुमार
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