फिलबदीह ग़ज़ल
कुछ ऐसा उससे बंधन हो गया है
वो मेरे दिल की धड़कन हो गया है
तसव्वुर उसका इक मुस्कान बन के
मेरे चेहरे का चंदन हो गया है
जो मेरी माँ की हाथों में कभी था
वही अब उसका कंगन हो गया है
बिछड़ के मुझसे अब मेरे लिये वो
मेरी आँखों का सावन हो गया है
चमन एहसास का बन कर के वो ही
मेरे ख़्वाहिश का उपवन हो गया है
नज़र जब से मिलीं हैं उससे तब से
मेरी ख़ातिर वो उलझन हो गया है
राजीव कुमार 😊😊😊
कुछ ऐसा उससे बंधन हो गया है
वो मेरे दिल की धड़कन हो गया है
तसव्वुर उसका इक मुस्कान बन के
मेरे चेहरे का चंदन हो गया है
जो मेरी माँ की हाथों में कभी था
वही अब उसका कंगन हो गया है
बिछड़ के मुझसे अब मेरे लिये वो
मेरी आँखों का सावन हो गया है
चमन एहसास का बन कर के वो ही
मेरे ख़्वाहिश का उपवन हो गया है
नज़र जब से मिलीं हैं उससे तब से
मेरी ख़ातिर वो उलझन हो गया है
राजीव कुमार 😊😊😊
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