Sunday, October 28, 2018

कुछ ऐसा उससे बंधन हो गया है

फिलबदीह ग़ज़ल

कुछ ऐसा उससे बंधन हो गया है
वो मेरे दिल की धड़कन हो गया है

तसव्वुर उसका इक मुस्कान बन के
 मेरे चेहरे का चंदन हो गया है

जो मेरी माँ की हाथों में कभी था
वही अब उसका कंगन हो गया है

बिछड़ के मुझसे अब मेरे लिये वो
मेरी आँखों का सावन हो गया है

चमन एहसास का बन कर के वो ही
मेरे ख़्वाहिश का उपवन हो गया है

नज़र जब से मिलीं हैं उससे तब से
मेरी ख़ातिर वो उलझन हो गया है

राजीव कुमार 😊😊😊

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