ग़ज़ल
हमारे दम से हासिल वो जो तख्तो ताज़ करता है।
वही तो बाद में हम सबको बे आवाज़ करता है
अगर सब ठीक है तो अस्ल कीमत क्या है राफेल की।
यही वो प्रश्न है जिसको नजर अंदाज़ करता है
नये भारत में जो अखबार सच को छाप दे वो ही।
बङे साहब को नाहक ही बहुत नाराज़ करता है
हमारे टेक्स के पैसे से उङने का मजा है क्या।
वही जाने जो एयर इण्डिया परवाज़ करता है
हमारी सरहदों से रोज लाशें आ रहीं है अब
हमारा शाह आखिर कौन सा ऐजाज़ करता है
वो जो करते नहीं कुछ भी वही हैं बोलते ज्यादा।
वगरना करने वाले का करम आवाज़ करता है।
तेरी तकरीर अच्छी है मगर ये याद भी रखना।
कभी रोटी के बदले काम क्या अल्फाज़ करता है
यही ज़म्हूरियत का अब नया दस्तूर है इसमें
किसी को हम हमें कोई नज़रअंदाज़ करता है
राजीव 🙂🙏
हमारे दम से हासिल वो जो तख्तो ताज़ करता है।
वही तो बाद में हम सबको बे आवाज़ करता है
अगर सब ठीक है तो अस्ल कीमत क्या है राफेल की।
यही वो प्रश्न है जिसको नजर अंदाज़ करता है
नये भारत में जो अखबार सच को छाप दे वो ही।
बङे साहब को नाहक ही बहुत नाराज़ करता है
हमारे टेक्स के पैसे से उङने का मजा है क्या।
वही जाने जो एयर इण्डिया परवाज़ करता है
हमारी सरहदों से रोज लाशें आ रहीं है अब
हमारा शाह आखिर कौन सा ऐजाज़ करता है
वो जो करते नहीं कुछ भी वही हैं बोलते ज्यादा।
वगरना करने वाले का करम आवाज़ करता है।
तेरी तकरीर अच्छी है मगर ये याद भी रखना।
कभी रोटी के बदले काम क्या अल्फाज़ करता है
यही ज़म्हूरियत का अब नया दस्तूर है इसमें
किसी को हम हमें कोई नज़रअंदाज़ करता है
राजीव 🙂🙏
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