Sunday, September 23, 2018

रंग नज़ाकत हुस्न की चाहत का उन्वान महब्बत है

ग़ज़ल

रंग नज़ाकत हुस्न की चाहत का उन्वान महब्बत है
इसका मतलब सबके भीतर का शैतान महब्बत है

वहसत तङपन राहत हिम्मत कभी कभी तो पागलपन।
अच्छा अच्छा समझ गया मैं ये सामान महब्बत है

अश्क खमोशी शोर तबाही एक मुसलसल बर्बादी।
यारों सबकी जान को आफत ये तूफान महब्बत है

दिल की चोरी जान पे कब्ज़ा नींद उङा लेने वाला
लोग समझते मुझको पर ये शैतान महब्बत है

उम्र की बंदिश शर्म की सरहद इसको कुछ मालूम नहीं
रंज हिकारत और मलामत से अन्जान महब्बत है।

मयखाने में शाम को साकी और हमारा टूटा दिल।
हम जैसों की ख़ातिर शायद जीवनदान महब्बत है

छोङ दिये है इस दुनिया में जिसने मज़हब जात अना।
सच कहता हूं यार कसम से वो ईन्सान महब्बत है

मीर कबीर या ग़ालिब दिनकर इनको पढ़कर देख तो लो।
तुम्हीं कहोगे लिखने वालों का भगवान महब्बत है

राजीव कुमार

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