आज का हासिल @Harish Darvesh Ji जी को समिक्षार्थ प्रेषित
हर एक दर्द मिटा दे हो इक ख़ुशी ऐसी।
ख़ुदा करे कि मिले सबको बेहतरी ऐसी।
वो खाक होके अभी तक है ज़हन में ज़िन्दा,
कभी न देखी थी मैने भी ज़िन्दगी ऐसी
कहीं न पीने लगे जह्र जाम के बदले
तुम्हारे बाद न हो जाये तिश्नगी ऐसी।
बुझा के ख़ुद को ज़माने को कर गया रौशन
किसी चिराग़ मे देखी न रोशनी ऐसी
न ख़ुद को पा ही सके और न हो सके उसके
न पूछो कैसे गुज़ारी है ज़िन्दग़ी ऐसी।
वो मिलना जुलना वो बातें वो रूठना हसना।
न होगी और किसी से ये दिल्लगी ऐसी
हर एक शख़्स किसे के लहू का प्यासा है
बताउं 🙂किसने मचाई है खलबली ऐसी।
हम और आप न संम्भले तो देखना इक दिन
ज़मीं को आग लगा देगी रहबरी ऐसी
हर एक शख़्स उसे कह के मां बुलाता है
हमारे शह्र में बहती है इक नदी ऐसी
जो दिल से होते हुए रूह में उतर जाए
कहाँ मिलेगी बताओ सुख़नवरी ऐसी।
राजीव कुमार
हरिद्वार
हर एक दर्द मिटा दे हो इक ख़ुशी ऐसी।
ख़ुदा करे कि मिले सबको बेहतरी ऐसी।
वो खाक होके अभी तक है ज़हन में ज़िन्दा,
कभी न देखी थी मैने भी ज़िन्दगी ऐसी
कहीं न पीने लगे जह्र जाम के बदले
तुम्हारे बाद न हो जाये तिश्नगी ऐसी।
बुझा के ख़ुद को ज़माने को कर गया रौशन
किसी चिराग़ मे देखी न रोशनी ऐसी
न ख़ुद को पा ही सके और न हो सके उसके
न पूछो कैसे गुज़ारी है ज़िन्दग़ी ऐसी।
वो मिलना जुलना वो बातें वो रूठना हसना।
न होगी और किसी से ये दिल्लगी ऐसी
हर एक शख़्स किसे के लहू का प्यासा है
बताउं 🙂किसने मचाई है खलबली ऐसी।
हम और आप न संम्भले तो देखना इक दिन
ज़मीं को आग लगा देगी रहबरी ऐसी
हर एक शख़्स उसे कह के मां बुलाता है
हमारे शह्र में बहती है इक नदी ऐसी
जो दिल से होते हुए रूह में उतर जाए
कहाँ मिलेगी बताओ सुख़नवरी ऐसी।
राजीव कुमार
हरिद्वार
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