तरही ग़ज़ल 🙂
दौर ए गर्दिश से अब निकलना हैl
अपने हालात को बदलना हैl
खुद से मिलना है इस लिये हमको
अपने भीतर से अब निकलना हैl
इस जमाने में इश्क करना तो।
धूप का बर्फ पे टहलना है l
आप को हमको उम्र भर देखोl
गिर के उठना है और चलना हैl
अपने हक के लिये हूकूमत केl
अब नहीं टालने से टलना है।
जो रीयाया को दर्द देती होl
ऐसी सरकार को बदलना हैl
इक जवानी में ही नहीं यारोंl
हमको हर उम्र में संभलना है।
ये जो ग़ज़लें हैं इस लिये हैं केl
दिल हमारा भी तो बहलना है।
राजीव कुमार
दौर ए गर्दिश से अब निकलना हैl
अपने हालात को बदलना हैl
खुद से मिलना है इस लिये हमको
अपने भीतर से अब निकलना हैl
इस जमाने में इश्क करना तो।
धूप का बर्फ पे टहलना है l
आप को हमको उम्र भर देखोl
गिर के उठना है और चलना हैl
अपने हक के लिये हूकूमत केl
अब नहीं टालने से टलना है।
जो रीयाया को दर्द देती होl
ऐसी सरकार को बदलना हैl
इक जवानी में ही नहीं यारोंl
हमको हर उम्र में संभलना है।
ये जो ग़ज़लें हैं इस लिये हैं केl
दिल हमारा भी तो बहलना है।
राजीव कुमार
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