गजल गोई में तब तक फायदा है
के जब तक मेहनताना मिल रहा है
कोई महफिल की जीनत हो गयी अब।
कोई महफिल का मालिक हो गया है
भला हो फेसबुक औ वाट्सअप का।
यहां गूंगा भी शाइर बन चुका है ।
किसी के शान में गुस्ताखियां हैं ।
किसी का नाम ही कुछ अटपटा है।
वफा के हक में दो एक शेर पढ़ के।
गली का रोमियो भी दिलजला है।
राजीव कुमार
खाने पीने का इन्तजाम करो
जिन्दा रहने का इन्तजाम करो
मुझको सच की तलाश करनी है
कोई चखने का इन्तजाम करो।
किसको तन्हाई से महब्बत है।
इससे बचने का इन्तजाम करो ।
आधिंयां चल रही है किस जानिब।
इनके थमने का इन्तजाम करो।
चांद हासिल किसे हुआ अब तक।
जाओ सोने का इन्तजाम करो।
आप ईमानदार बन जाना ।
पहले खाने का इन्तजाम करो।
राजीव कुमार
के जब तक मेहनताना मिल रहा है
कोई महफिल की जीनत हो गयी अब।
कोई महफिल का मालिक हो गया है
भला हो फेसबुक औ वाट्सअप का।
यहां गूंगा भी शाइर बन चुका है ।
किसी के शान में गुस्ताखियां हैं ।
किसी का नाम ही कुछ अटपटा है।
वफा के हक में दो एक शेर पढ़ के।
गली का रोमियो भी दिलजला है।
राजीव कुमार
खाने पीने का इन्तजाम करो
जिन्दा रहने का इन्तजाम करो
मुझको सच की तलाश करनी है
कोई चखने का इन्तजाम करो।
किसको तन्हाई से महब्बत है।
इससे बचने का इन्तजाम करो ।
आधिंयां चल रही है किस जानिब।
इनके थमने का इन्तजाम करो।
चांद हासिल किसे हुआ अब तक।
जाओ सोने का इन्तजाम करो।
आप ईमानदार बन जाना ।
पहले खाने का इन्तजाम करो।
राजीव कुमार
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