Monday, October 13, 2014

ये सच है उम्र भर नहीं मिलती।

गजल आप के नाम_____

ये सच है उम्र भर नहीं मिलती।
खुशी खरीदकर नहीं मिलती।

अमीरे शहर नाम का है बस।
कि रोटी पेट भर नहीं मिलती।

है डूबा नाक तक कोई लेकिन।
किसी को बूंद भर नहीं मिलती।

ये ही है मौत तेरा रुतबा भी।
किसी से पूछ कर नहीं मिलती।

ये जिद नहीं ये मेरी गैरत है।
नहीं ये दर ब दर नहीं मिलती।

हुआ है क्या तेरी मुहब्बत को।
वफा से तर ब तर नहीं मिलती।

खबर जहान की है लेकिन क्युं।
मुझे तेरी खबर नहीं मिलती।

राजीव कुमार

बस इक मैं ही नहीं तन्हा अकेले।

एक छोटी कोशिस

बस इक मैं ही नहीं तन्हा अकेले।
हर इक दुनिया से है जाता अकेले ।

बहुत कुछ जीत कर भी सोचता हुं।
मुझे खुद से भी है लङना अकेले।

मेरी ख्वाहिस हकीकत बन कभी तू।
ये जीना भी है क्या जीना अकेले।

गजल हो जायेगी मेरी मुक्मल।
कभी मिलने तो मुझसे आ अकेले ।

दिलों की दूरीयां आ कम करें हम।
कोई रिस्ता नहीं बनता अकेले।

राजीव कुमार

हर एक शै में इक कमी क्युं है।

नयी गजल अभी अभी______
हर एक शै में इक कमी क्युं है।
इसी का नाम जिन्दगी क्युं है।

जुदाई गम की खुश्क रातें है।
सुबह मगर ये शबनमी क्युं है।

मुकाबले में आज इन्सां के।
उसी की सारी बुजदिली क्युं है।

खुदा तू जानता तो होगा ही ।
जुदा मुझी से हर खुशी क्युं है।

हमारे गर्दिशों के किस्सों में।
हर इक दफा ही बेबसी क्युं है।

फसल जो अम्न की उगाते है।
उन्ही के घर में खुदखुशी क्युं है।

हमारे शहर के चिरागों से ।
खफा खफा ये रौशनी क्युं है।

सजा तो खुद ब खुद मुहब्बत है।
जमाने भर को दुश्मनी क्युं है।

यही है रंग तेरी महफिल का।
सभी में इतनी बेखुदी क्युं है।

सवाल भी तेरा ये कैसा है।
तुझी से इतनी दिल्लगी क्युं है।

मुझे पता है जानता है तू।
तेरे लिये ही आशिकी क्युं है।

राजीव कुमार

समंदर है कोई सहरा नहीं है।

गजल आप की मोहब्बतों की तालिब ___________

समंदर है कोई सहरा नहीं है।
ये मेरा दिल तेरे जैसा नहीं है।

कली तितली बहारें बाग है पर ।
मेरा मन भी कोई भौरा नहीं है।

हसीं यादें तेरी तन्हाईयों में ।
मुझे कहतीं है तू तन्हा नहीं है।

तेरी हर बेरुखी में थी मुहब्बत।
तभी मुझको कोई सिकवा नहीं है।

तुझे चाहुं मै कितना सोचता हुं।
सिवा इसके कोई चारा नहीं है।

जमाने का अगर है डर तो आजा।
खुवाबो पर कोई पहरा नहीं है।

बदलते वक्त ने बदला नहीं कुछ।
हमारे बीच क्या रिश्ता नहीं है।

है तुझसे रूह का रिस्ता तभी तो।
तुझे खोने का भी खतरा नहीं है।

यही सब कुछ तो रहता है जहन में
दिवाना दिल मगर कहता नहीं है।

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...