Friday, November 19, 2021

नफ़रत की तीरगी को मिटाने का वक़्त है।

ग़ज़ल (Happy Independence Day)

नफ़रत की तीरगी को मिटाने का वक़्त है।
उल्फ़त की रौशनी में नहाने का वक़्त है।

हर एक दुश्मनी को भुलाने का वक़्त है।
उजड़े हुए चमन को बसाने का वक़्त है।

घर से निकल के सड़कों पे आने का वक़्त है।
ज़िन्दा हैं अब भी हम ये बताने का वक़्त है।

ख़ामोशियों को शोर बनाने का वक़्त है।
जो सो रहे हैं उनको जगाने का वक़्त है।

वहशत की आग ज़िस्म जलाने लगी है पर।
किरदार अब भी अपना बचाने का वक़्त है।

इस बेहतरीन वक़्त में किस डर से हो छुपे।
यारों यही तो जान लुटाने का वक़्त है।

मौतों का सिलसिला भी अभी तक नहीं रुका।
यानी कि ये सवाल उठाने का वक़्त है।

भूखा  गरीब  रोता  हुआ  देख  कर  लगा।
चिड़ियों के साथ बाज लड़ाने का वक़्त है।

बाघों  को जिस  तरह  से बचाने में हैं लगे।
वैसे ही  अब  ये देश  बचाने  का वक़्त है।

राजीव कुमार

Monday, October 4, 2021

हैं जिनके पेट भरे वो ही ज्ञान देते हैं

डा0राहत इन्दौरी साहब को समर्पित🙏🙏

हैं   जिनके   पेट   भरे  वो ही ज्ञान देते हैं 
गरीब   लोग   तो  हर  रोज   जान देते हैं

गुलाम थे तो गुलामी का ये सबब था  पर
किसान    आज   भी  देखो लगान देते हैं

हमारे गांव में  मोहन की बांसुरी सी हसीं
सवेरे    फूल    से    बच्चे  अजान देते हैं

अजीब  दौर है  जीते जी लोग चुप है पर
नदी    में    तैरते    मुर्दे   बयान   देते  हैं

हम ऐसे लोग वही लोग हैं जो उल्फत में
कभी   जबान    कभी    इम्तिहान देते हैं

कभी  ये  सोचा   है जो बांण मार ही देंगे
उन्ही  के हाथ   में हम क्यूँ कमान देते हैं

वही लिखा है जो दिल में कई दिनों से था
वो ना पढ़ें  जो गज़ल पर ही ध्यान देते हैं 

राजीव कुमार

Friday, June 11, 2021

वहशत का दौर ऐसा भी लाया गया था दोस्त

वहशत का दौर ऐसा भी लाया गया था दोस्त 
पहरा हर इक जबां पे बिठाया गया था दोस्त

लोगो को बेवकूफ बनाया गया था दोस्त 
मौतों के आकङो को छुपाया गया था दोस्त 

इस डर से कहीं घाव बदन के न बोल दें 
हाथों से सबके मुह को दबाया गया था दोस्त 

मै चाह कर भी भूल नहीं सकता ये भी सच 
लोगो का कत्ल करके बहाया गया था दोस्त

ये बात उस चमन कि है जिसका हर एक फूल 
मसला गया था और जलाया गया था दोस्त

कातिल भी कत्ल करके साफ साफ बच गया 
हर इक सूबूत ऐसे मिटाया गया था दोस्त

क्या-क्या कहूं मैं दौर ए तबाही के नाम पर 
सांसों को फेफङों से चुराया गया था दोस्त

मातम हर एक घर में था मत पूछ किस तरह 
इमेज हुक्मरां का बचाया गया था दोस्त 

राजीव कुमार

Saturday, June 5, 2021

हम चरागों के हक़ में तागी से

ग़ज़ल-2

हम चरागों के हक़ में तागी से
आज तक लड़ रहे हैं आंधी से

दिल की बस्ती में एक जुल्मी से
दिल लगाया है अपनी मर्जी से

बात बरसों पुरानी है लेकिन 
इश्क अब भी है उस ही लङकी से

उसका चेहरा है हर्फे उर्दू तो
उसकी आंखें हैं शह्र ए हिन्दी से

सर से पा तक गज़ल है सो यारों
उसको पढते हैं हम भी  मस्ती से

मेरी चाहत है मय की इक बोतल
और इक शेर उसकी शोखी से

इश्क की दास्ताँ यही है कि
आग की दोस्ती है पानी से

याद करके अब ऐसा लगता है
दिल लगाया था कैसी जिद्दी से

इस लिये मिल न पाये हम दोनो
कानपुर से थी वो, मै दिल्ली से

राजीव कुमार

लौट आये हैं हम बलंदी से

लौट आये हैं हम बलंदी से 
इस लिये लग रहे हैं जख्मी से 

क्यु डराते हो हमको भट्टी से 
बल नहीं जाते यूं ही रस्सी से

खाक जाये तुम्हारी ताकत पर 
हम भी डरते नहीं हैं धमकी से

क्या कोई जानता है अबके साल 
मर गये लोग कितने सर्दी से

सारे फैशन ही ओल्ड फैशन हैं
आप क्युं लड़ रहे हैं  दर्जी से

मर के जिन्दा तो हो नही सकते 
इस लिये जी रहे है सुस्ती से

राजीव कुमार

Thursday, June 3, 2021

दिल की फिजा को संवारा है इश्क ने हमको पुकारा है

गीत

दिल की फिजा को संवारा है 
इश्क ने हमको पुकारा है 
फूल पे शबनम बुला रही है किरणों को 
और जमीं पर गिरा दिया है रंगों को

ख्वाब जो था सच वो हुआ 
चाहा जिसे मिल वो गया 
होश नही है अपना हमें जरा भी

जब भी करीब आती है
दिल मे लहर उठ जाती है 
जैसे सागर में उठती हैं धारायें

मिट्टी की खुश्बू  बारिस से 
आसमां चमके आतिश से 
चाहूं उसे ही और उसी से घबराउं

जैसे शजर से परिंदा है 
इश्क उसी से जिंदा है 
बाग मे तितली फूल की रंगत बोलते है
दिल की फिजा को संवारा है 
इश्क ने हमको पुकारा है 
फूल पे शबनम बुला रही है किरणों को 
जैसे जमीं पर गिरा दिया हो हीरों को

राजीव कुमार

Sunday, May 30, 2021

हर इक नक्श उसका मिटाने से पहले

ग़ज़ल 

हर इक नक्श उसका मिटाने से पहले
मै  रोया  बहुत  खत जलाने से  पहले

कई    ख्वाहिशों  को  मिटाना  पङेगा 
बदन   की  हदों  को  मिटाने से पहले

तो  क्या  शेर  में ये भी कहना  पङेगा
मैं रखता  हूँ तुझ  को ज़माने से पहले

अजीब आदमी  है ये डरता है कितना
जो  सच  है  वही सच बताने से पहले

निभाने  का  पहले इरादा  तो कर  लो
हमे   अपना  दुश्मन  बनाने  से  पहले

न   भूलो   हमारे   लिये   है   ये मोती
कोई   आंसू   अपना  बहाने  से पहले

बहुत लोग कहते हैं अच्छा था  राजीव 
मुहब्बत  की  दुनिया में आने  से पहले

राजीव कुमार

मुसीबत से जो डर जाये वो रहबर हो नहीं सकता

ग़ज़ल 

मुसीबत   से   जो डर  जाये वो रहबर हो नहीं सकता 
चमकने    वाला   हर   पत्थर जवाहर हो नहीं सकता

ख़ुदा ख़ुद   को  समझने  लग गया है वो ज़मीं का पर 
हक़ीक़त  में  कभी  क़तरा   समन्दर   हो नहीं सकता 

व्यवस्था   वेन्टीलेटर   पर  हो  जिसकी  बादशाहत में
वो बंदा     कुछ भी हो सकता है पर्वर  हो नहीं सकता 

मुझे   अग़वा करा   दो मार   डालो या   जला  दो पर 
तुम्हारा   झूठ   मेरे    सच   से   ऊपर  हो नहीं सकता

अँधेरे  में  रहा  है   इस    लिये   ग़फ़लत  में  है   वर्ना 
कभी     ये    चाँद   सूरज  के  बराबर हो नहीं सकता

मुहब्बत   पर यक़ीं जिसको नहीं वो शख़्स दुनिया का
शहंशाह बन के   भी लोगो का अकबर हो नहीं सकता

ज़रूरत   है    हमें    इक    दूसरे   को  थामे  रहने की 
कोई   बीमार  हो   के ख़ुद   चरागर   हो  नहीं  सकता

राजीव कुमार

रहबर- पथ प्रदर्शक
जवाहर - रत्न 
अकबर -  महान
पर्वर- रक्षक
चरागर - डाक्टर

Sunday, April 18, 2021

कोई रदीफ नहीं है न काफिया है भला

ग़ज़ल 

कोई रदीफ नहीं  है न काफिया है भला 
हमारी डायरी मे कुछ नहीं  लिखा है भला 

न तो हवा ही सही है न फेफड़ा है भला 
हमारे  वास्ते कुछ भी नहीं बचा है भला

बहुत जियादा नहीं यार सोचना है भला
बुरे तो हम हैं हमारा तो रहनुमा है भला

हम ऐसे  लोग जिये या मरें हमारा क्या 
हमारी  छोड़ो  हमें कौन पूछता है भला

गुरूर आप  का  टूटे न  इस लिये साहब 
हमारी सांस  का  इसबार  टूटना है भला

हर  एक  बात  पे आँसू बहाना ठीक नही
हर एक सानिहा अब कौन झेलता है भला

बचेंगे  लोग  तो  हर  रोज   सर  उठायेंगे 
मेरे हिसाब से इन सब को रौदना है भला

हकीम ए शहर  तो  बीमार है मगर हाकिम?
अब और कुछ नहीं हमारा बोलना है भला

अमीरे शह्र  के  बारे  में  क्या बतायें यहां
न तो निजाम कोई है न औलिया है भला

राजीव कुमार
सानिहा - दुर्घटना 
औलिया - संत

Friday, April 16, 2021

हवा की उंगली पकड़ के चलना

गीत

हवा की उंगली पकड़ के चलना 
तू आसमानो पे जब टहलना 
रे मन के पंछी 
ओ रे परिंदे

धीमे धीमे लहरों सी मन में उठे ख्याल 
सोधो सोधी खुश्बू सी दिल मे उठे उबाल 
जा के मैं चांद सितारों के घर को
तेरी खुश्बू से महका दूं 
रे मन के पंछी 
ओ रे परिंदे

याद वो आये तो ख्वाब सजाऊ 
पास जो आये उसे गलेसे लगाऊ 
साथ चले तो सारी दुनिया में उसको 
हाथ पकङ के घुमाऊं 
रे मन के पंछी 
ओ रे परिंदे

सूबह की सबनम बुलाये आ जा 
गुलों की रंगत बढाने आ जा 
 तू  एक मीठी नदी के जैसे
आ इश्क मुझको पिला जा 
रे मन के पंछी 
ओ रे परिंदे

हवा की उंगली पकड़ के चलना 
तू आसमानो पे जब टहलना 
रे मन के पंछी 
ओ रे परिंदे

राजीव कुमार

Thursday, April 15, 2021

इक नई आस दे इक नई दे सहर


गीत

इक नई आस दे इक नई दे सहर
तू अगर है तो नजरे इनायत तो कर

जिन्दगी दर ब दर देख ले हो गयी
हर खुशी बे असर देख ले हो गयी 
सारे मंजर पे मातम है पसरा हुआ 
दिल की दुनिया मे हर एक रोता हुआ

अब परिन्दों के हक में रहें किस तरह
अब दरख्तों के हक में रहें किस तरह 
चांद तारों की बाते करे किस तरह 
हम नजारों की बाते करे किस तरह

गीली आंखों मे फिर से चमक चाहिये 
अब नही और इनमें नमक चाहिये 
स्याह रातों की वीरानिया खत्म हो
सांस लेने की दुश्वारियां खत्म हो

सबको होठों पे अब कहकसां टांग दे 
सबके चेहरों पे वो वाकया टांग दे 
सुब्ह सबनम की हल्की नमी से सजे
शाम अपनी हर इक रौशनी से सजे

Rajeev kumar 

जाने किस शय को पाने के इम्कान में।

ग़ज़ल

जाने किस शय को पाने के इम्कान में।
हम चले आये हैं शह्र ए वीरान में

वक्त ऐसा भी आयेगा सोचा न था 
लोग खुद रहना चाहेंगे जिंदान में

रोज आंखे दिखाता था सागर सो हम
लौट आये हैं साहिल से तूफान में

जब से देखा है तुमको तुम्हे क्या पता 
सारे गुल हैं परेशां गुलिस्तान में 

उसका जाते हुए चूम लेना मुझे 
फायदा में हूं या के हूं नुकसान में

जिन्दगी की अजीयत से इक पल सूकूं
कैसे पायेंगे हम दौर ए हिज्रान में 
हिज्रान- जुदाई 

अच्छे अच्छे बिखर जाते हैं टूट कर 
हमने देखा है उल्फ़त के दौरान में

प्रेम क्या है समझना है तो देखिये 
या तो मीरा के दिल में या रसखान में

राजीव कुमार

Wednesday, April 14, 2021

सता रही है जिन्दगी

गीत


 सता रही है जिन्दगी

रूला रही है आशिकी

मेरे लिये जमीन पर 

कदम कदम है तिश्नगी


जला रही है धूप भी बदन हमारे ख्वाब का 

मिटा के रख न दे कही चमन हमारे ख्वाब का 

बहार फूल तितलिया हवा नदि घटा पहाङ 

सदाये दे रहा है अब वतन हमारे ख्वाब का


सता रही है जिन्दगी

रूला रही है आशिकी

मेरे लिये जमीन पर 

कदम कदम है तिश्नगी


न चैन ना करार है मगर ये प्यार प्यार है 

कभी जो खत्म हो ही ना वो दिल मे इन्तजार है

मगर वो दूर हो के भी लगे की आस पास है। 

ये मेरे जिद की जीत है या उसके जिद की हार है


सता रही है जिन्दगी

रूला रही है आशिकी

मेरे लिये जमीन पर 

कदम कदम है तिश्नगी


बस एक बार देख ले बुला या नाम ले मेरा 

कोई तो मेरा साथ दे कोई तो हो मेरा खुदा 

बदन की हद को छोङ के हर एक रस्म तोङ के।

कोई तो इस हिसाब से मेरे लिये भी हो बना


सता रही है जिन्दगी

रूला रही है आशिकी

मेरे लिये जमीन पर 

कदम कदम है तिश्नगी


राजीव कुमार

Wednesday, April 7, 2021

दिल से निकले तो हर इक बात जबां तक पहुंचे

ग़ज़ल 

दिल से निकले तो हर इक बात जबां तक पहुंचे
ये महब्बत की सदा कौन-ओ-मकां तक पहुंचे
कौन-ओ-मकां- संसार 

इश्क़ मरता नहीं दुनिया में उन्ही लोगों का 
छोङ के जिस्म जो महबूब की जां तक पहुंचे

तब समझ आया महब्बत के सफर का मतलब 
जब बहारों के हसीं फूल खिजां तक पहुंचे

शह्र दर शह्र भटकते हुए वीरानों में 
हमसे पूछो न कहां पर थे कहां तक पहुंचे

सिर्फ सीने में उतरना ही नहीं है  काफी
तीर वो है जो निगाहों से दिलाँ तक पहुंचे  
दिलाँ - hearts 

मेरी ख्वाहिश है कि आंखों से जो तुम कहती हो
ये भी अंदाज कभी हर्फे बयां तक पहुंचे

मुझसे मिलने के लिये उसका पहुचना मुझ तक
जैसे मुमताज महल शाह-जहां तक पहुंचे

इक इसी आस में ये नज्म ग़ज़ल शेर कहे 
कोई पैगाम तो उस दुश्मने जां तक पहुंचे

राजीव कुमार

Tuesday, April 6, 2021

जमीं को चूमता अम्बर नहीं मिलेगा तुम्हें

ग़ज़ल 

जमीं को चूमता अम्बर नहीं मिलेगा तुम्हें 
नगर में गांव सा मंजर नहीं मिलेगा तुम्हें

तलाश खुद में तुम्हें करना पड़ेगा उसको 
ख़ुदा वो शय है जो बाहर नहीं मिलेगा तुम्हें

तुम्हारी ज़िद है तो जाओ बस इतना कहना है 
मेरे मिजाज का दिलबर नहीं मिलेगा तुम्हें

कभी मिलो तो बहाने से पूछना वर्ना
किसी हसीन का नम्बर नहीं मिलेगा तुम्हें

ख़्याल दिल में तुम्हारा है ख्व़ाब आंखों  में 
तुम्हारा कोई भी  बेघर नहीं मिलेगा तुम्हें

जो दिल के घाव सीये ग़म भी टांक दे सारे
हमारे जैसा रफूगर नहीं मिलेगा तुम्हें

सफ़र हयात का होता तो है हसीन मगर 
सुकून इस पे घङी भर नहीं मिलेगा तुम्हें

चला गया तो मेरी  जान मेरे आने का 
हो जिसमें दिन वो कैलेंडर नहीं मिलेगा तुम्हें

राजीव कुमार

Sunday, April 4, 2021

माना की गुज़री बात का चर्चा खराब है।

ग़ज़ल 

माना   की  गुज़री  बात का  चर्चा खराब है।
लेकिन अजाब   ज़हन में   रखना खराब है।

गेंहूं   बहुत   बुरा   है     न   गन्ना  खराब है।
फिर  भी   अजीब   है कि ये पेशा खराब है।

दौलत  अना    ईमान  वफा  इश्क़ का नशा।
मत  पूछ इस  जहान में  क्या क्या खराब है।

आखिर मे इश्क़ जीते जी दोनों को खा गया।
क़िस्सा  तो  ये हसीन था  लिक्खा खराब है।

शाइर  फकीर  औलिया  सारे  जहीन  लोग 
उल्फत में हर किसी  का तज्रिबा  खराब है।

आंखों में कुछ नमी भी हो ख्वाबों के साथ साथ
दरया ए चश्म   ठीक    है   सहरा   खराब है

चैनल   हमारे   देश   के   बतला  रहे  हैं कि।
देखो   गधा   तो   ठीक   है  घोड़ा  खराब है।

पैगाम   दे   रहा   है   महब्बत   का अब वही।
सचमुच में जिसका आज-कल माथा खराब है

Rajeev kumar

Thursday, April 1, 2021

निकली है दिल से जान मगर तुमको इससे क्या

 ग़ज़ल 

निकली है दिल से जान मगर तुमको इससे क्या 
टूटा है  ये  मकान   मगर   तुमको इससे क्या

आंखें  चुका  रहीं  हैं  गमे  हिज्र  का हिसाब 
हो  कर  लहू लुहान  मगर तुमको इससे क्या

मायूस  जब  हुआ तो कहा दिल से अक्ल ने
होता है मेरी  जान  मगर  तुमको इससे क्या 

आंखो में  कितने  डूब गये ख्वाब आज तक 
फिर भी हूं शादमान मगर तुमको इससे क्या

अपने  लिये  तो बोलते तो हो चीखते भी हो 
हम तो हैं बे-जबान मगर तुमको इससे क्या

दुनियां  की  दौलतें  हों   इकट्ठा  तुम्हारे  घर 
चाहे  लुटे  जहान  मगर  तुमको  इससे क्या

अपनी    अना    में   चूर  रहो  और  यू रहो  
गिर जाये आसमान मगर तुमको इससे क्या

हर  रोज  लड़  के  मर रहे  हैं  अपने देश में 
हिन्दू से मुसलमान मगर  तुमको  इससे क्या 

थाली   में   रोटी  दाल   हमारी  परोस  कर 
भूखा है वो किसान मगर तुमको इससे क्या

राजीव कुमार

Tuesday, March 30, 2021

जिनगी मे प्यार बाटे तबले बहार बाटे

 भोजपुरी गीत

जिनगी मे प्यार बाटे तबले बहार बाटे 
जिनगी मे प्यार नइखे त कुछ भी यार नइखे

जब जब खुले इ अंखिया 
तब सामने तू र ह 
जब होखे यार रतिया।
सपना मे तू ही आ व 
यानी कि तहसे मिल के
तहरे ही बात करीं 
दिन रात तू भी हमसे 
हम तोहसे प्यार करीं

जिनगी मे प्यार बाटे तबले बहार बाटे 
जिनगी मे प्यार नइखे त कुछ भी यार नइखे

सुबह से शाम तोहरे
चाहत के नाम तोहरे 
अपने ही मन के ह पर 
ह दिल गुलाम तहरे 
जीवन भी नाम तहरे 
राधे ओ श्याम तोहरे 
मन्दिर मे हमरे घर के 
सीता ओ राम तोहरे 

जिनगी मे प्यार बाटे तबले बहार बाटे 
जिनगी मे प्यार नइखे त कुछ भी यार नइखे

बगीया के फूल जइसे 
चंदा के रूप जइसे 
तू जिन्दगी मे र ह 
सुबह के धूप जइसे 
तू साथ हमरे र ह 
त हमरे जीत हटे 
दिल से क ह तनी हम 
दिल के इ गीत हटे

जिनगी मे प्यार बाटे तबले बहार बाटे 
जिनगी मे प्यार नइखे त कुछ भी यार नइखे

राजीव कुमार

Thursday, March 25, 2021

हमें पता है कि दूर हो तुम करीब आओ

 ग़ज़ल 
हमें पता है कि दूर हो तुम करीब आओ 
हमारी वहसत का हल निकालो हमें बचाओ

लिपट के पेङों से ये परिंदे भी कह रहे है।
हमारी दुनिया से हम परिंदों को मत मिटाओ 

जमीं पे आकर अगर रहेंगी ये मछलियाँ तो 
तुम ही कहोगे कि सागरों से जमीं बचाओ

मै हसते हसते जो रो रहा हूं तो ये भी तय है 
मैं रोते रोते भी हस पङूंगा मुझे रुलाओ

वो एक लङकी जो अब नहीं है हमारे खातिर 
हम अब भी उसके लिये बचे हैं उसे बताओ

जरूर धरती का आसमां पर है कर्ज कोई 
मेरी सुनो तो इसे भी इक दिन जमीं पे लाओ

मै आंसुओं का हिसाब माँगूं तो किससे माँगू 
मेरे गुनाहों की पहले कोई सजा सुनाओ

उसी ने मुझको भुला दिया है कि जिससे अक्सर 
मैं बोलता था कि सारी दुनिया को भूल जाओ
राजीव कुमार

दुनिया की तो याद है दिल की भूल गये

 गज़ल 


दुनिया की तो याद है दिल की भूल गये 

इश्क़ के मारे अपनी बस्ती भूल गये 


उसकी ज़िद थी हमको भूलने की लेकिन 

हम तो अपनी सारी ज़िद ही भूल गये 


जाने कैसे सोती होगी वो लड़की 

हम तो जैसे नींद ही अपनी भूल गये 


याद करें तो कैसे उसको याद करें 

पर्स में रख के फोटो उसकी भूल गये 


इक बेचैनी साथ हमारे रहती है

जब से उसके लब की सूर्खी भूल गये


सुबह का भूला शाम को घर आ जाता है 

यानी दिल में यार हैं लड़की भूल गये


सबकुछ हमने गाँव से ही पाया लेकिन 

शह्र गये तो गाँव की मिट्टी भूल गये 


उसको भूलने के चक्कर में देखो ना 

उसकी बातें याद हैं अपनी भूल गये


राजीव कुमार

Saturday, March 13, 2021

लोग हसी ए डर से कौनो टाल मटोली ठीक ना ह

 भोजपुरी ग़ज़ल 

लोग हसी ए डर से कौनो टाल मटोली ठीक ना ह

अपनो दिल के बात बताव एतना चुप्पी ठीक ना ह 


प्यार करेलू लेकिन हमके प्यार करे से रोकेलू 

दिल से हमरे सू न एतना धक्का मुक्की ठीक ना ह


हुस्न प तहरे दूसर शाइर गजल लिखे ना होखे देम

दूध के रखवाली कsरे में कौनो बिल्ली ठीक ना ह


नयन कटारी हुस्न तबाही अदा त जइसे एटम बम

उनके आगे भाला बरछी चाकू छूरी ठीक ना ह


जान भी ए मे चल जाई और पता भी तहके ना चली 

हसी ठीठोली प्यार के लेके हरोघरी ठीक ना ह


ऊ का जाने देश के हमरे बात के माटी माई के 

इहंवा जे ई बात कही की चोखा लिट्टी ठीक ना ह


पइसा रुपया गाङी घोङा देख के जे परपोज करे।

जीवनसाथी खातिर अइसन लइका लइकी ठीक ना ह


राजीव कुमार

Friday, March 12, 2021

प्यार होखल गुनाह ना होला

प्यार होखल गुनाह ना होला
ए से केहू तबाह ना होला 

फिर भी सच्चाई और महब्बत के
एतना आसान राह ना होला

माई बाबू के बात से निम्मन 
अउर कौनो सलाह ना होला

अब त ला गsता खेती बाड़ी से 
ज्यादा बङहन गुनाह ना होला

जे के दिल से गिरा दे जनता ऊ
कुछ भी होखेला शाह ना होला

प्रेम से बढ़ के लोक शाही में 
कौनो ताकत अथाह ना होला

दिल से निकले न जबले तब तक ले
वाह-वाह वाह-वाह ना होला

राजीव कुमार

Thursday, March 11, 2021

इक अरसे से मेरी खुद से जंग अभी तक जारी है।

ग़ज़ल 

इक अरसे से मेरी खुद से जंग अभी तक जारी है।
एक   तरफ है   बेईमानी एक   तरफ  खुद्दारी  है।

कपड़े फोटो नावेल तोहफे चिट्ठी फूल निशानी याद
जाने कितनी चीजों का घर कमरे की अल्मारी है 

मिट्टी का  मिट्टी में  मिलना ही अंजाम नहीं होता।
सच पूछो तो नये सफर की ये तो बस तैय्यारी है।

वीरानों  की भीङ में बैठा एक परींदा है जिसकी।
शोर में  इक  दुश्वारी है  औ चुप्पी  में  लाचारी है।

जंगल  आग  तबाही  सारे एक जगह ही रहते हैं।
यार  महब्बत  का  किस्सा भी ऐसे ही दो धारी है।

चांद सितारे ख्वाब अंधेरा  और ये घर  की दीवारें।
इक मुद्दत  से गोद  में इनके  हमने रात गुजारी है।

दोस्त किताबें गजलें दौलत तेरी खातिर हर इक से।
जाने  कब-कब  बैर  हुआ है जाने कब से यारी है।

उसका ही आसान है जीना इस दुनिया में जिसके भी
दिल मे  थोङी  नादानी  है  थोङी  सी  मक्कारी है।

घर से  दफ़्तर  के रस्ते  पर  जाते  जाते सोचता हूं।
पीछे  दुनिया   छूट  गयी   है  आगे  दुनियादारी  है।

आती  जाती सांसें मुझसे बोलती रहती हैं  अक्सर।
जीवन  है  इक पेङ  तो राजू सांस तुम्हारी आरी है।

राजीव कुमार


Sunday, March 7, 2021

जेकरा में ईमान बहुत बा

*भोजपुरी ग़ज़ल *

जेकरा में   ईमान   बहुत बा 
अब   उ  परेशान  बहुत बा

जियले मुश्किल  बाटेे  इहंंवा
मरल  त   आसान  बहुत बा

सच्चाई पर अब   के   चली 
इ रस्ता   सुनसान बहुत बा

परजा भूखे  बीया फिर भी 
राजा जी  के शान बहुत बा

हर  मुद्दा  पर  हावी   इहंवा
हिन्दू   मूसलमान   बहुत बा

भूख   गरीबी    बेकारी   से 
इ हाकिम अन्जान बहुत बा

सबके   रोटी    देवे    वाला 
करजा में   कीसान बहुत बा 

पहिले  भी  मुश्किल  रहे पर 
सांसत में अब जान बहुत बा 

चुप  बानी  जा पर हमनी के।
जियरा   में   तूफान बहुत बा 

राजीव 🙏♥️

Saturday, March 6, 2021

दिन खुशनुमा हसीन हर इक रात हो गइल

 भोजपुरी गजल

दिन खुशनुमा हसीन हर इक रात हो गइल
जब उन से बात चीत के शुरवात हो गइल।

बादल बगैर शहर  में  बरसात हो गइल 
अइसन भी एक रोज करामात हो गइल

सीना में हमरे होके भी धङकत बा उनके ला
अइसन ए दिल के हाय रे औकात हो गइल

मिल के ऊ हम से खुश रहे पर लौटते समय 
फिर से  लङाई हमनी में बे बात हो गइल

ओ कर शहर शहर ही रहल पर हमार गांव।
ओ बे वफा के इश्क में देहात हो गइल

राजीव कुमार

Thursday, March 4, 2021

होली जीवन में चाहत के फन ह

 होली जीवन में चाहत के फन ह
होली राधा के दिल में किसन ह
होली लइकन के बस खेल नाहीं
होली हर एक दिल के मिलन ह 

फूल जइसे सभे खिल-खिलाये 
कौनो दुख ना कभी के हू पाये
लाल पीयर हरा नीला धानी 
हर कलर सबके सुन्दर बनाये 
बाग ह अउर इहे चमन ह 
होली जीवन मे चाहत के फन ह

भाई देवर के ईमान रक्खे 
जीजा साली के सम्मान रक्खे
अपने भीतर कबो केहू खातिर 
केहू ना कौनो अपमान रक्खे  
प्रेमी जोङन के खातिर अगन ह
होली जीवन में चाहत के फन ह

दुश्मनी खत्म कइले के दिन ह
दोस्ती करके घूमे के दिन ह 
हिन्दू मुस्लिम के झगङा इहां से
दोस्त ईहे  मिटाये के दिन ह 
रंग चङ जाये जे पर ऊ मन ह
होली जीवन में चाहत के फन ह

राजीव कुमार

Saturday, February 27, 2021

भोजपुरी गीत प्यार करके निभाये के पङी

 प्यार करके निभाये के पङी 

खुद के अइसन बनाये के पङी

केतनो मुश्किल रही राह लेकिन 

चल के मीले के आये के पङी


M

सांस  ह  चाह  ह  जिन्दगी ह 

प्यार हमनी के खातिर खुशी ह

F

याद रखिह जमाना के खातिर 

आशिकी जुर्म ह दुश्मनी ह

M+F

जख्म हस हस के खाये के पङी 

प्यार करके निभाये के पङी


F

जेतना  होला सवेरे उजाला 

ओतने जीवन में तोहरा से बाटे 

M

रात रानी के खुशबू के जइसे

खुशबू जीवन में तोहरा से बाटे

F+M

जिन्दगी के सजाये के पङी 

प्यार करके निभाये के पङी


F

जान रहे न रहे बदन में 

फिर भी रह ब तुही हमरे मन में  

M

हमरे खातिर तू ही जान हऊ

हमरे जीवन के अभिमान हऊ

M+F

मर के भी लौट आये के पङी 

प्यार करके निभाये के पङी 


राजीव कुमार

Friday, February 26, 2021

हुस्न रंगत जुल्फ शोखी नाज ओ नखरा देखकर।


ग़ज़ल


हुस्न रंगत जुल्फ शोखी नाज ओ नखरा देखकर।

छू के देखूं दिल में रख लूं तुझको चाहा देखकर।


रौशनी अब रात भर छत पर ही रहती हे मिरे।

चांद रुक जाता है हर शब तेरा चेहरा देखकर।


सबनमी होती है उस दिन की सुबह ए जानेजा

जागता हुं नीद से जब ख्वाब तेरा देखकर


खूब रोती हैं लिपट कर हमसे अब तनहाईयां।

थक गयीं हैं ये बेचारी तेरा रस्ता देखकर।


राजीव कुमार

हजार मुश्किल हर एक गम के बस एगो हल ह तोहार चेहरा।

 भोजपुरी ग़ज़ल 

हजार मुश्किल हर एक गम के बस एगो हल ह तोहार चेहरा।
हमार जीवन में सबसे ज्यादा खुशी के पल ह  तोहार चेहरा।

हसीन मौसम  फिजा के  रंगत   हर   एक   तोहरे  से मेल खाला।
ई सब नकल  ह  हमार मा न त बस असल  ह तोहार चेहरा।

हवा के ठंडक  नियर  बुझाये  कि जब भी सपना तोहार आये ।
ए गर्म  मौसम  में  सच  कही   त  हवा महल ह तोहार चेहरा।

कभी जे देखबू त जान जइबू न फूल कौनो न कौनो गुलसन।
हमार  आखीं  के  पोखरी  में  हसीं  कमल  ह  तोहार  चेहरा।

नजर  झुकावल ,  तोहार  हसल इ  सब  अदा  से कबो-कबो त।
इ शक  उठे  ला कि  जइसे कवनो हसीन छल ह तोहार चेहरा।

बस इ दुआ बा कि हर जनम में इहे तू बोला ईहे  कही हम
तहार   बल  ह हमार   चेहरा   हमार   बल  ह   तोहार चेहरा

राजीव कुमार

 

हज़ार मुश्किल हर एक गम का बस एक हल है तुम्हारा चेहरा।

 हिन्दी में


हज़ार मुश्किल हर एक गम का बस एक हल है तुम्हारा चेहरा।
हमारे जीवन में सबसे ज्यादा ख़ुशी का पल है तुम्हारा चेहरा।

हसीन मौसम बहार रंगत हर एक तुमसे ही मेल खाता।
ये सब नकल हैं हमारी मानो तो बस असल है तुम्हारा चेहरा।

हवा के जैसे  लगे है शीतल कि जब भी आये तुम्हारा सपना।
ये गर्म मौसम में सच कहूँ तो हवा महल है तुम्हारा चेहरा।

कभी जो देखो  तो गौर करना  न फूल कोई न कोई गुलशन।
हमारी आँखों की झील में एक हसीं कमल है तुम्हारा चेहरा।

नज़र झुकाना  तुम्हारा हँसना इन्हीं  अदाओ  से दिल में अक्सर 
 ये शक है उठता कि जैसे कोई हसीन छल है तुम्हारा चेहरा।

यही  दुआ है कि हर जनम में ये तुम भी बोलो ये हम भी बोलें
तुम्हारा बल है हमारा चेहरा हमारा बल है तुम्हारा चेहरा।

राजीव कुमार

Monday, February 8, 2021

बात दिल में रोकात नईखे अब।

 भोजपुरी ग़ज़ल 


बात  दिल  में   रोकात नईखे अब।

मुह  से  लेकिन बोलात नईखे अब।


झुठ    धोखा     फरेब     बरियाई।

हमसे   कौनो   सहात   नईखे अब।


रोज  वाट्स  अप पे  मीम भेजेला।

चाहे   लईका  कमात  नईखे  अब।


बात   पर   बात     रोज   होखेला।

बात फिर    भी ओरात नईखे अब।


तीनों   टाईम    ए    देश   में  काहे।

केहू  बढ़ीयां   से  खात नईखे अब।


भूख     बेकारी      सम्प्रदायिकता।

कुछ भी  इहंवा से जात नईखे अब।


रेप    हत्या       डकैती      पेपर में।

आखिर   काहे  लिखात नईखे अब।


अउर   सम्मान    मत  दs हमरा के।

हमरे   दिल   में   समात नईखे अब।


सांच  बो लs  तsरs  त बोलs पर।

सांच  कहिंयो   सुनात   नईखे अब।

 

राजीव कुमार

जेकरे भीतर गुमान हो जाला

 भोजपुरी ग़ज़ल 


घाव    जेतना   पुरान  हो जाला 

दर्द   ओतने  जवान   हो  जाला 


जेकरे   भीतर   गुमान हो जाला

झूठ  ओकर   बयान   हो जाला 


पइसा पदवी ठसक अकड़ पावर

एक दिन सब  जियान हो जाला


ए किसानन   के  नाम   पर काहें  

बंद    सबके  जबान   हो  जाला


न्याय   मांगे   में   अउर  पावे  में 

यार  आफत   मे  जान हो जाला


कहियो  आ  व देखा  दी खेते मे

कइसे  कीचड़  में  धान हो जाला


खाली बोली से कुछ न होला बस

सूने   वाला    हरान   हो    जाला


खाला ठोकर जे ओके ओतने ही

दुनियादारी   के   ज्ञान  हो जाला


 प्रेम  दिल  में रहे त हर मुश्किल 

हसते-हसते   निदान   हो  जाला


राजीव कुमार

जेकरा भीतर डर बइठल बा

 भोजपूरी ग़ज़ल


जेकरा भीतर डर  बइठल बा

 उहे नेवा के सर  बइठल बा 


ए  धरती  के  ऊपर  कब से

दे खअ ना अम्बर बइठल बा


के का करी  देश  के खातिर

सब केहू जब घर बइठल बा


हमरे  भीतर  के  ऊ लईका

आजो ले ममहर बइठलबा


ए बाबू  हम्मन  के  किस्मत

जाने कौन शहर बइठल बा


महल  में  तू त   बा ड़ लेकिन 

लोग   इहां  बेघर   बइठल बा 


दू कौङी  के  जान  के खातिर

खोल के ऊ दफ्तर बइठल बा 


जनता  से  ज्यादा के इहवा

अतना ताकतवर बइठल बा?


राजीव कुमार

जे भी जहंवा बा ऊ ठहर जाई

 भोजपुरी ग़ज़ल 


जे भी जहंवा बा  ऊ  ठहर जाई 

एक  दिन  जिन्दगी  गुजर  जाई


देह से प्यार  एतना  मत कSरS

देह   मरी   त  प्यार   मर   जाई


होई    तब्बे   खुशी  के अंदाजा 

आंख   में  लोर  जब उतर जाई


साथ   जायेके   बा  महब्बत में

ले  के  जहंवा  ले ई  डगर जाई


जान   जाई   त  जाई  इहवां से 

एकहूं   आदमी    ना   घर जाई


हार  जायेंम  जे  हमरे  गउंवा के 

कौनो बच्चा भी तोहसे डर जाई


ई भगत सिंह के  देश  ह  इहंवा 

मौत   से  जिन्दगी  संवर   जाई 


राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...