गज़ल
दुनिया की तो याद है दिल की भूल गये
इश्क़ के मारे अपनी बस्ती भूल गये
उसकी ज़िद थी हमको भूलने की लेकिन
हम तो अपनी सारी ज़िद ही भूल गये
जाने कैसे सोती होगी वो लड़की
हम तो जैसे नींद ही अपनी भूल गये
याद करें तो कैसे उसको याद करें
पर्स में रख के फोटो उसकी भूल गये
इक बेचैनी साथ हमारे रहती है
जब से उसके लब की सूर्खी भूल गये
सुबह का भूला शाम को घर आ जाता है
यानी दिल में यार हैं लड़की भूल गये
सबकुछ हमने गाँव से ही पाया लेकिन
शह्र गये तो गाँव की मिट्टी भूल गये
उसको भूलने के चक्कर में देखो ना
उसकी बातें याद हैं अपनी भूल गये
राजीव कुमार
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