Wednesday, April 7, 2021

दिल से निकले तो हर इक बात जबां तक पहुंचे

ग़ज़ल 

दिल से निकले तो हर इक बात जबां तक पहुंचे
ये महब्बत की सदा कौन-ओ-मकां तक पहुंचे
कौन-ओ-मकां- संसार 

इश्क़ मरता नहीं दुनिया में उन्ही लोगों का 
छोङ के जिस्म जो महबूब की जां तक पहुंचे

तब समझ आया महब्बत के सफर का मतलब 
जब बहारों के हसीं फूल खिजां तक पहुंचे

शह्र दर शह्र भटकते हुए वीरानों में 
हमसे पूछो न कहां पर थे कहां तक पहुंचे

सिर्फ सीने में उतरना ही नहीं है  काफी
तीर वो है जो निगाहों से दिलाँ तक पहुंचे  
दिलाँ - hearts 

मेरी ख्वाहिश है कि आंखों से जो तुम कहती हो
ये भी अंदाज कभी हर्फे बयां तक पहुंचे

मुझसे मिलने के लिये उसका पहुचना मुझ तक
जैसे मुमताज महल शाह-जहां तक पहुंचे

इक इसी आस में ये नज्म ग़ज़ल शेर कहे 
कोई पैगाम तो उस दुश्मने जां तक पहुंचे

राजीव कुमार

No comments:

Post a Comment

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...