गीत
हवा की उंगली पकड़ के चलना
तू आसमानो पे जब टहलना
रे मन के पंछी
ओ रे परिंदे
धीमे धीमे लहरों सी मन में उठे ख्याल
सोधो सोधी खुश्बू सी दिल मे उठे उबाल
जा के मैं चांद सितारों के घर को
तेरी खुश्बू से महका दूं
रे मन के पंछी
ओ रे परिंदे
याद वो आये तो ख्वाब सजाऊ
पास जो आये उसे गलेसे लगाऊ
साथ चले तो सारी दुनिया में उसको
हाथ पकङ के घुमाऊं
रे मन के पंछी
ओ रे परिंदे
सूबह की सबनम बुलाये आ जा
गुलों की रंगत बढाने आ जा
तू एक मीठी नदी के जैसे
आ इश्क मुझको पिला जा
रे मन के पंछी
ओ रे परिंदे
हवा की उंगली पकड़ के चलना
तू आसमानो पे जब टहलना
रे मन के पंछी
ओ रे परिंदे
राजीव कुमार
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