Sunday, April 4, 2021

माना की गुज़री बात का चर्चा खराब है।

ग़ज़ल 

माना   की  गुज़री  बात का  चर्चा खराब है।
लेकिन अजाब   ज़हन में   रखना खराब है।

गेंहूं   बहुत   बुरा   है     न   गन्ना  खराब है।
फिर  भी   अजीब   है कि ये पेशा खराब है।

दौलत  अना    ईमान  वफा  इश्क़ का नशा।
मत  पूछ इस  जहान में  क्या क्या खराब है।

आखिर मे इश्क़ जीते जी दोनों को खा गया।
क़िस्सा  तो  ये हसीन था  लिक्खा खराब है।

शाइर  फकीर  औलिया  सारे  जहीन  लोग 
उल्फत में हर किसी  का तज्रिबा  खराब है।

आंखों में कुछ नमी भी हो ख्वाबों के साथ साथ
दरया ए चश्म   ठीक    है   सहरा   खराब है

चैनल   हमारे   देश   के   बतला  रहे  हैं कि।
देखो   गधा   तो   ठीक   है  घोड़ा  खराब है।

पैगाम   दे   रहा   है   महब्बत   का अब वही।
सचमुच में जिसका आज-कल माथा खराब है

Rajeev kumar

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