डा0राहत इन्दौरी साहब को समर्पित🙏🙏
हैं जिनके पेट भरे वो ही ज्ञान देते हैं
गरीब लोग तो हर रोज जान देते हैं
गुलाम थे तो गुलामी का ये सबब था पर
किसान आज भी देखो लगान देते हैं
हमारे गांव में मोहन की बांसुरी सी हसीं
सवेरे फूल से बच्चे अजान देते हैं
अजीब दौर है जीते जी लोग चुप है पर
नदी में तैरते मुर्दे बयान देते हैं
हम ऐसे लोग वही लोग हैं जो उल्फत में
कभी जबान कभी इम्तिहान देते हैं
कभी ये सोचा है जो बांण मार ही देंगे
उन्ही के हाथ में हम क्यूँ कमान देते हैं
वही लिखा है जो दिल में कई दिनों से था
वो ना पढ़ें जो गज़ल पर ही ध्यान देते हैं
राजीव कुमार
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