Monday, February 8, 2021

जेकरा भीतर डर बइठल बा

 भोजपूरी ग़ज़ल


जेकरा भीतर डर  बइठल बा

 उहे नेवा के सर  बइठल बा 


ए  धरती  के  ऊपर  कब से

दे खअ ना अम्बर बइठल बा


के का करी  देश  के खातिर

सब केहू जब घर बइठल बा


हमरे  भीतर  के  ऊ लईका

आजो ले ममहर बइठलबा


ए बाबू  हम्मन  के  किस्मत

जाने कौन शहर बइठल बा


महल  में  तू त   बा ड़ लेकिन 

लोग   इहां  बेघर   बइठल बा 


दू कौङी  के  जान  के खातिर

खोल के ऊ दफ्तर बइठल बा 


जनता  से  ज्यादा के इहवा

अतना ताकतवर बइठल बा?


राजीव कुमार

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