लौट आये हैं हम बलंदी से
इस लिये लग रहे हैं जख्मी से
क्यु डराते हो हमको भट्टी से
बल नहीं जाते यूं ही रस्सी से
खाक जाये तुम्हारी ताकत पर
हम भी डरते नहीं हैं धमकी से
क्या कोई जानता है अबके साल
मर गये लोग कितने सर्दी से
सारे फैशन ही ओल्ड फैशन हैं
आप क्युं लड़ रहे हैं दर्जी से
मर के जिन्दा तो हो नही सकते
इस लिये जी रहे है सुस्ती से
राजीव कुमार
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