गीत
दिल की फिजा को संवारा है
इश्क ने हमको पुकारा है
फूल पे शबनम बुला रही है किरणों को
और जमीं पर गिरा दिया है रंगों को
ख्वाब जो था सच वो हुआ
चाहा जिसे मिल वो गया
होश नही है अपना हमें जरा भी
जब भी करीब आती है
दिल मे लहर उठ जाती है
जैसे सागर में उठती हैं धारायें
मिट्टी की खुश्बू बारिस से
आसमां चमके आतिश से
चाहूं उसे ही और उसी से घबराउं
जैसे शजर से परिंदा है
इश्क उसी से जिंदा है
बाग मे तितली फूल की रंगत बोलते है
दिल की फिजा को संवारा है
इश्क ने हमको पुकारा है
फूल पे शबनम बुला रही है किरणों को
जैसे जमीं पर गिरा दिया हो हीरों को
राजीव कुमार
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