Thursday, June 3, 2021

दिल की फिजा को संवारा है इश्क ने हमको पुकारा है

गीत

दिल की फिजा को संवारा है 
इश्क ने हमको पुकारा है 
फूल पे शबनम बुला रही है किरणों को 
और जमीं पर गिरा दिया है रंगों को

ख्वाब जो था सच वो हुआ 
चाहा जिसे मिल वो गया 
होश नही है अपना हमें जरा भी

जब भी करीब आती है
दिल मे लहर उठ जाती है 
जैसे सागर में उठती हैं धारायें

मिट्टी की खुश्बू  बारिस से 
आसमां चमके आतिश से 
चाहूं उसे ही और उसी से घबराउं

जैसे शजर से परिंदा है 
इश्क उसी से जिंदा है 
बाग मे तितली फूल की रंगत बोलते है
दिल की फिजा को संवारा है 
इश्क ने हमको पुकारा है 
फूल पे शबनम बुला रही है किरणों को 
जैसे जमीं पर गिरा दिया हो हीरों को

राजीव कुमार

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