Wednesday, April 14, 2021

सता रही है जिन्दगी

गीत


 सता रही है जिन्दगी

रूला रही है आशिकी

मेरे लिये जमीन पर 

कदम कदम है तिश्नगी


जला रही है धूप भी बदन हमारे ख्वाब का 

मिटा के रख न दे कही चमन हमारे ख्वाब का 

बहार फूल तितलिया हवा नदि घटा पहाङ 

सदाये दे रहा है अब वतन हमारे ख्वाब का


सता रही है जिन्दगी

रूला रही है आशिकी

मेरे लिये जमीन पर 

कदम कदम है तिश्नगी


न चैन ना करार है मगर ये प्यार प्यार है 

कभी जो खत्म हो ही ना वो दिल मे इन्तजार है

मगर वो दूर हो के भी लगे की आस पास है। 

ये मेरे जिद की जीत है या उसके जिद की हार है


सता रही है जिन्दगी

रूला रही है आशिकी

मेरे लिये जमीन पर 

कदम कदम है तिश्नगी


बस एक बार देख ले बुला या नाम ले मेरा 

कोई तो मेरा साथ दे कोई तो हो मेरा खुदा 

बदन की हद को छोङ के हर एक रस्म तोङ के।

कोई तो इस हिसाब से मेरे लिये भी हो बना


सता रही है जिन्दगी

रूला रही है आशिकी

मेरे लिये जमीन पर 

कदम कदम है तिश्नगी


राजीव कुमार

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