गीत
सता रही है जिन्दगी
रूला रही है आशिकी
मेरे लिये जमीन पर
कदम कदम है तिश्नगी
जला रही है धूप भी बदन हमारे ख्वाब का
मिटा के रख न दे कही चमन हमारे ख्वाब का
बहार फूल तितलिया हवा नदि घटा पहाङ
सदाये दे रहा है अब वतन हमारे ख्वाब का
सता रही है जिन्दगी
रूला रही है आशिकी
मेरे लिये जमीन पर
कदम कदम है तिश्नगी
न चैन ना करार है मगर ये प्यार प्यार है
कभी जो खत्म हो ही ना वो दिल मे इन्तजार है
मगर वो दूर हो के भी लगे की आस पास है।
ये मेरे जिद की जीत है या उसके जिद की हार है
सता रही है जिन्दगी
रूला रही है आशिकी
मेरे लिये जमीन पर
कदम कदम है तिश्नगी
बस एक बार देख ले बुला या नाम ले मेरा
कोई तो मेरा साथ दे कोई तो हो मेरा खुदा
बदन की हद को छोङ के हर एक रस्म तोङ के।
कोई तो इस हिसाब से मेरे लिये भी हो बना
सता रही है जिन्दगी
रूला रही है आशिकी
मेरे लिये जमीन पर
कदम कदम है तिश्नगी
राजीव कुमार
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