ग़ज़ल
हर इक नक्श उसका मिटाने से पहले
मै रोया बहुत खत जलाने से पहले
कई ख्वाहिशों को मिटाना पङेगा
बदन की हदों को मिटाने से पहले
तो क्या शेर में ये भी कहना पङेगा
मैं रखता हूँ तुझ को ज़माने से पहले
अजीब आदमी है ये डरता है कितना
जो सच है वही सच बताने से पहले
निभाने का पहले इरादा तो कर लो
हमे अपना दुश्मन बनाने से पहले
न भूलो हमारे लिये है ये मोती
कोई आंसू अपना बहाने से पहले
बहुत लोग कहते हैं अच्छा था राजीव
मुहब्बत की दुनिया में आने से पहले
राजीव कुमार
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