Friday, December 23, 2022

चsलीं ना कहियो चsले के घूमे हमनियो के

भोजपुरी ग़ज़ल 

          चsलीं ना कहियो  चsले के घूमे हमनियो के 
          निकलल बा लोग देश के जोड़े हमनियो के

          जबले  बेवाई  गोड़   में   फाटी  ना  रोड  पे
          तबले  ना  आई ठीक  से बोले  हमनियो के

          नफरत टिसाही झूठ जुलम अउर दिल के डर 
          देखीं ना के के आईल  बा रोके हमनियो के

          दियरी  के  जान बाची हवा से तबे की जब
          आई ना  मोह  जान  के  छोड़े  हमनियो के

           कबले   मुड़ि  नेवा   के  जीये  के मरे के बा 
          कहिया ले  नाही  आई  ई  पूछे हमनियो के

          सागर  से एगो  ठोप  लड़े चल  देले  बा  तs
           देहल  जाई  ना  ठोप  के  हारे  हमनियो  के

           लsड़े  के बा त उठ के लड़ भूल के ई  बात
           दुश्मन  आईल  बा  घेर के मारे हमनियो के

            आखिर   ई  प्रेम   का  ह  इहे  आरजू तs ह 
            केहू  त   नाम  ले  के   पुकारे  हमनियो  के

                         राजीव कुमार 
                         #भारत जोड़ो

सामईन (श्रोतागण) कृपया ध्यान दें

सामईन (श्रोतागण) कृपया ध्यान दें 

क्या मंच से बोला है सुना करिये सामईन 
कवियों पे नज़र आप रखा करिये सामईन

ये चाहते हैं भूख कजा मुफ्लिसी  को भूल।
जय जय किसी की आप सदा करिये सामईन

जो शेर कह रहे है वो सब जुल्म से डर के
आखिर कहां छुपे है पता करिये सामईन

कुछ भी सुना के चल दें तो मत दाद दीजीए
उंगली उठा के इन पे हंसा करिये सामईन

अपने ही दिल की लिख रहे हैं पढ़ रहे हैं सब 
ऐसे में आप अपनी कहा करिये सामईन

लोगो का जो नहीं है वो गीतों के हैं कहां 
ये भी सवाल दिल  में रखा करिये सामईन

जिनको न कोई शर्म है न फिक्र आप की
उन साहिबे अदब से बचा करिये सामईन

जो हक में आप ही के नहीं उनपे आप भी
गर हो सके तो सख्त रहा करिये सामईन

राजीव कुमार

गांव के खुश्बू भूल के गर्दा शहर के फांके आइल बा

भोजपुरी ग़ज़ल 

गांव के खुश्बू भूल के गर्दा शहर के फांके आइल बा 
असली दौलत छोड़ के नकली माल कमाये आइल बा

माई के हाथ के लिट्टी चोखा सत्तू ठेकुआ छोड़ के अब
केतना लोग शहर में छुछे रोटी खाये आइल बा

खेत बगईचा इनरा पोखर महुआ गूलर सरसों धान
जब्बो आंख मुदाइल आंख में सपना इहे आइल बा।

पहिला प्यार भइल जेकरा से अब्बो गांव में बीया ऊ
लोग दवाई छोड़ के शहर  दर्द बढ़ावे आइल बा

चांद सितारा जुगनू बारिस सगरो पिंक लिफाफा में 
रख के भेजs ले बीया बुचिया डाकीया लेके आइल बा

याद त होखबे कsरी तहके सावन के पहिला बरसात। 
माई कहे दे खs धरती पर बादर घुम्मे आइल बा

मंज़िल सामने बाटे तब्बो बइठ के सोचत बानी हम 
हमरे जइसे आखिर केतना लोग इहां ले आइल बा

गांव से शsहर जाये वाली ट्रेन प चढ़ते लागेला 
आत्मा पीछे छूट गइल बा देह अकेले आइल बा

राजीव कुमार

ज्ञान आपन बड़ावल भी हsटे बिहानदिल से नफरत मिटावल भी हsटे बिहान

ज्ञान आपन बड़ावल भी हsटे बिहान
दिल से नफरत मिटावल भी हsटे बिहान

फूल के मुस्कूरावल भी हsटे बिहान
रंग आपन देखावल भी हsटे बिहान 

सिर्फ सूरज के उगला से ना होला हो
एगो दियरी जरावल भी हsटे बिहान

गांव से दूर होखला प मालुम परल 
खेत में कुछ उगावल भी हsटे बिहान

 प्रेम जहवां बा उंहवा ए संसार में 
एक दुजे के पावल भी हsटे बिहान

झूठ के सगरो जंजाल के तूर के 
सच के चीरई उड़ावल भी हsटे बिहान

 खाली पुजला से नाहीं अनहरिया मिटी
लईकियन के पढ़ावाल भी हsटे बिहान

अन्धविश्वास जाति धरम के जहर 
सबके मन से मिटावल भी हsटे बिहान

एगो सूरज डूबा के उगावला खातिर 
छठ के दउरा उठावल भी हsटे बिहान

का महेन्दर मिसिर का भिखारी बबा 
गीत ए लो के गावल भी हsटे बिहान

राजीव कुमार

ज्ञान आपन बड़वला से होला बिहान

केहू पूछे‌ कि बिहान का होला त इ दे देब 😊

*बिहान*

ज्ञान आपन बड़वला से होला बिहान 
दिल से नफरत मिटवला से होला बिहान 

फूल के मुस्कूरवला से होला बिहान 
रंग आपन देखवला से होला बिहान 

खाली सूरज के उगला से ना होला हो
एगो दियरी जरवला से होला बिहान 

गांव से दूर होखला प मालुम परल 
खेत में कुछ उगवला से होला बिहान 

 प्रेम जहवां बा उंहवा ए संसार में 
एक दुजे के पवला से होला बिहान 

झूठ के सगरो जंजाल के तूर के 
सच के चीरई उड़़वला से होला बिहान 

 खाली पुजला से नाहीं अनहरिया मिटी
लईकियन के पढवाला से होला बिहान 

अन्धविश्वास जाति धरम के जहर 
सबके मन से मिटवला से होला बिहान 

एगो सूरज डूबा के उगावला खातिर 
छठ के दउरा उठवला से होला बिहान 

का महेन्दर मिसिर का भिखारी बबा 
गीत ए लो के गवला से होला बिहान 

राजीव कुमार

Friday, December 2, 2022

उन्निस के बात छोड़ के बाइस के ओर देख

भोजपुरी 

उन्निस के बात छोड़ के बाइस के ओर देख 
बाईस में आ के बोले लें चौबिस के ओर देख

उत्सव के साल हटे तू अमरित के बात कर  
रोटी के मोह छोड़ के किसमिस के ओर देख 

अन्याय जुल्म दर्द अउर मर चुकल समाज  
देखे के बा त शर्म से बिल्किस के ओर देख

कब्बो त अपने झूठ के चश्मा ऊतार के 
आंखी से अपने देश के मुफ्लिस के ओर देख

हमनी के हर सवाल प मी ल ता ई जवाब 
मालिक के बात छोड़ के वारिस के ओर देख 

सगरो अमीर लोग के बगली में डाल के 
क ह ता नौजवान से पूलिस के ओर देख

नफरत के आग कहियो जरा दी समूचा देश
भाई रे धर्म जात के माचिस के ओर देख

लागता देश फिल्म ह आ प्रेम चोपड़ा 
क ह तरें सूनील से नर्गिस के ओर देख

शायर R कुमार

Wednesday, November 30, 2022

भोजपुरी गीत बिहान

भोजपुरी गीत बिहान 

अपने ताकत के ना आजमावल गईल
हाथ से हाथ जे ना मिलावल गईल 
दिल में दियरी न जबले जरावल गईल
प्रेम के गीत मिल कि ना गावल गईल 
तबले सूरज से कहत रही आसमान 
कहिया होई बिहान 
कबले होई बिहान

खेत खलिहान में सब उजर जाई हो
सबके सपना भी आंखी में मर जाई हो 
घsर जर जाई बाचल रही बस महल 
ए मूसीबत के मीली ना कौनो बदल 
हथ मल के कही नौजवान आ किसान 
कहिया होई बिहान
कबले होई बिहान

मांग करब तू हक के त गाली मिली 
कब्बो गोली मीली कब्बो लाठी मिली 
अपने भय के मिटा  द जमाना मिली
ना त  ठेहा मिली ना ठिकाना मिली 
उठ के पुछे ला ना जे तू खोल ब जबान  
कहिया होई बिहान 
कबले होई बिहान

ए से पहिले अन्हरिया निगल जाये सब 
केहू पूछे की जीवन मिली हमके कब 
कबले घर होई कबले मिली नौकरी 
गांव में हमनी के कबले आई खुशी 
ना त जियते जी सब इंहवां होई जियान  
कहिया होई बिहान
कबले होई बिहान

राजीव कुमार

Tuesday, November 15, 2022

प्रभारी न्याय पंचायत कृषि

*प्रभारी न्याय पंचायत कृषि*

हर इक मुश्किल को‌ सहता है प्रभारी न्याय पंचायत
मगर हर काम करता‌ है‌ प्रभारी न्याय पंचायत

जहां तक जा नहीं सकती कोई गाड़ी सवारी भी।
वहां मौजूद रहता‌ है प्रभारी न्याय पंचायत

कभी साहब कभी जनता कभी नेताओं की खिच-खिच
सभी की बात सुनता है प्रभारी न्याय पंचायत

रसायन बीज यंत्रों और किसानों की जरूरत को।
हमेशा पूरा करता है प्रभारी न्याय पंचायत

ये सब स्टोर लेजर कैसबुक चालान और डीटू‌ 
इन्हीं में जीता मरता है प्रभारी न्याय पंचायत

जरूरत से जयादा बीज आवंटन अगर हो तो 
रीकवरी खुद से भरता है प्रभारी न्याय पंचायत

बिना एफटीए टैंकों चेक डामों के लिए हर दिन
पहाड़ों पर भटकता है प्रभारी न्याय पंचायत

इलेक्शन बीमा ट्रेनिंग आपदा शासन प्रशासन की
हर इक ड्यूटी में पिसता है प्रभारी न्याय पंचायत

कई पंचायतों के चार्ज हैं और एक स्कूटी।
बेचारा फिर भी चलता है प्रभारी न्याय पंचायत

न तो है सैलरी अच्छी ना ही है ओपीएस पेंशन।
अजी ऐसा ही होता है प्रभारी न्याय पंचायत।

राजीव कुमार
सहायक कृषि अधिकारी वर्ग 1
ओखलकाण्डा नैनीताल

Monday, September 5, 2022

खुश्बू का लुत्फ लीजीये मौसम के साथ साथ

खुश्बू का लुत्फ लीजीये मौसम के साथ साथ
गांधी को बात  कीजीये  गौतम के साथ साथ

अपने   हको   हकूक  को  पाना  है तो हूजूर 
आवाज  भी  उठाईये  परचम  के साथ साथ

सारे  गुलाम   बन  गये   इक्का  तो   देखना 
रोयेगा  बादशाह  भी  बेगम  के  साथ साथ

दिलवर की याद आये तो गजलो को गाईये 
जख्मों के नाम लीजीये मरहम के साथ साथ

अब तक की जिन्दगी का यही फलस्फा है के
लूडो का खेल खेलिये कैरम के साथ साथ

असलम के साथ दोस्ती राजीव की ए दोस्त
दिखती है जैसे रौशनी शबनम के साथ साथ

राजीव कुमार

Thursday, September 1, 2022

बाजी कहां बा अब इहां रानी के हाथ में

भोजपुरी ग़ज़ल 

      बाजी  कहां बा  अब इहां रानी के हाथ में
      अब खेल आ गइल बा अडानी के हाथ में

      जी जान से हर रोल निभवला के बाद भी 
      नाटक   के  जान  बाटे कहानी के हाथ में

      अंखिया के अन्जुरी में बचावल ना गईल त 
      हमनी के प्यास मर जा ई पानी के हाथ में

      जे तीर बन के उड़ रहल बा उनकरो उड़ान
      हर दम  गुलाम  रsही  कमानी  के  हाथ  में

      बदलाव तबले आ ई ना लोगन के सोच में 
      जबले  ना  देश  आई  जवानी  के हाथ में

      उनकर दिहल हर एक घाव अबले देह पर
      रखले  बानी  जतन से निशानी के हाथ में

      तोहके  अगर  उड़ाए के बा  प्रेम  के पतंग
      तs डोर  दिल  के दे दs रवानी के हाथ में

राजीव कुमार

Sunday, August 28, 2022

जिन जिन को लग रहा था कि शेरों की मौज है

जिन जिन को लग रहा था कि शेरों की मौज है
अब वो ही कह रहे हैं कि गदहों की मौज है 

इस दौर के निजाम में भक्तों की मौज है 
यानी की अब समाज में कव्वों  की मौज है

चैनल जला रहे हैं अलख राष्ट्रवाद के 
यानी कि राष्ट्रवाद से गिद्धों की मौज है

जिन से कभी मरा नही चूहा वो कोकरोच। 
हमको बता रहे हैं कि चीतों की मौज है 

हिन्दू तङप के मर गये कोविड में और ये 
भाषण में बोलते हैं कि लोगों की मौज है

आम आदमी की नौकरी खतरे में है मगर
चंदे के लूट पाट में नल्लों की मौज है

बनते हैं सारे धर्म के रक्षक बङे-बड़े 
इनके ही राज पाट में गुण्डो की मौज है

लब्बो लूबाब ये है कि इस देश में अभी। 
शेरों की बात छोङिये कुत्तों  की मौज है

शायर Rajeev कुमार क्रोधित 😡

#desh_drohi_kalicharan

तख्ती लेकर घर से निकलो जोर से बोलो डूब मरो

तख्ती   लेकर  घर  से निकलो जोर से बोलो डूब मरो 
सरकारों   में    बैठने   वालों    कुर्सी  छोङो  डूब मरो

बस्ती-बस्ती  मातम   है    और    शह्रों-शह्रों   वीरानी।
देखो  आंखे  खोल  के  देखो देख  लिया तो डूब मरो

रहबर  से   उम्मीद   लगा के  क्यु  बैठे हो उठ जाओ 
वर्ना  अगली  नस्ल   कहेगी  हमको  जाओ  डूब मरो

गुलशन को  शमशान  बनाने  वालों ये भी रखना याद
जलती लाशे ख्वाब में हर शब कहेंगी तुमको डूब मरो

इस वहशत के मंजर से अंजान भी हो और खुश भी हो
ऐसे   झूठे   लोगों   को  अब  मुह पर कह दो डूब मरो

फस्ले  गुल   का   वादा था  पर  ले  आये  सहराओं में
अच्छा जब  आ  पहुंचे  हो  तो कुछ मत पूछो डूब मरो

कोई  मसीहा  कोई  मुसाहिब   कोई  सहाफी  आयेगा
आप  अभी  तक इन  सपनों में डूबे  हो  तो  डूब  मरो

अब तो घर से बाहर आ  कर  बोलना  होगा हाकिम से
साहब  हमको  मार दो या  फिर  ऐसा कर लो डूब मरो

अपनी   किस्मत   अपने  हाथों   लिखने   वाले जीतेगे
बहलावों   में   रहने    वालों    मेरी   मानो   डूब   मरो

राजीव कुमार

व्यवस्था ए समाज के खराब हो गइल बा अब

भोजपुरी 

व्यवस्था ए समाज के खराब हो गइल बा अब 

बेकार लोक तंत्र के किताब हो गइल बा अब


आवाज के उठाई जब डेरा रहल बा सब केहू

इ हाल नौजवान के जनाब हो गइल बा अब


जहाँ पे रोजी रोटी शिक्षा प्रेम के सवाल बा 

उंहा पुलिस के लाठीये जवाब हो गइल बा अब


लङाई जात धर्म के पहुच गइल गली-गली 

विकास ए नजर से  बे हिसाब हो गइल बा अब


जे साधू संत बा ऊहो ई देख के हरान बा 

फकीर राज-नीत में नवाब हो गइल बा अब 


भुजा रहल बा भुखमरी के आग के अलाव पर

गरीब आदमी इहां कबाब हो गइल बा अब


जे सांच बात बोले ऊ त कांट के समान बा।

जे सिर्फ झूठ बोले ऊ गुलाब हो गइल बा अब  


हर एक जुल्म ज्यादती के राज के छुपावे के

ई राम जी के नाम भी नकाब हो गइल बा अब


राजीव कुमार

सभनी के उड़ता तीर बना के रखे के बा

भोजपुरी 

सभनी के उड़ता तीर बना के रखे के बा 
लईकन के अग्निवीर बना के रखे के बा 

काहे ला बा हरान ई सब  नौजवान  लोग
हर एक के फकीर बना के रखे के बा

पेट्रोल नून तेल किरासन के भाव के।
असमान ले लकीर बना के रखे के बा

दंगा फसाद खून खराबा आ रेप पर 
बोले बिना जमीर बना के रखे के बा

हो भुखमरी के बात या हो मीडिया के हाल
भारत के अब नजीर बना के रखे के बा

खाये के मिले ना मिले पर खा तनी कसम
ओकरे के ही वजीर बना के रखे के बा

शिक्षा विकास रोजगार के अलाव पर 
जाति धरम के खीर बना के रखे के बा

अमृत के ई ऊ काल है जे में रवीश जी 
पानी से अब पनीर बना के रखे के बा

शायर राजीव कुमार

जइसन ए देश में अब महगाई हो रहल बा।

 भोजपुरी ग़ज़ल 

जइसन ए देश में अब महगाई हो रहल बा।
वइसे  कमाई  सबके  चौथाई हो  रहल बा।

बरियार के  त इहवा हर खून मा फ बा पर।
कमजोर  आदमी  से  बरियाई हो रहल बा।

जिनका के न्याय चाहीं उनके पे जुल्म होता।
अइसे त  पीड़िता  के  सुनवाई  हो रहल बा।

लाठी  के दम पे  शासन  परचार में तरक्की।
सेवा  करे  के  बा  पर  ढीठाई  हो  रहल बा।

हालत पढ़े लिखे  के  अइसन बा देश में की।
लइका  पढाई  पढ़  के  दंगाई  हो  रहल बा।

देखे  गरीब   बस्ती  केहू  न  ए  ला  ओकरे।
आगे   दिवार  चुन  के  रंगाई  हो  रहल  बा।

खेती   कमाई   धंधा   मेहरारू   के   सुरक्षा।
हर  काम  में इहां  पर  ढीलाई  हो  रहल बा।

मुस्लिम से आज हिन्दू अइसे कटल कि जइसे।
भाई  के  जानी दुश्मन अब भाई हो रहल बा।

राजीव कुमार

मेहरारू के इज्जत का बा

भोजपुरी 


 मेहरारू के इज्जत का बा 

जान के इंहवा कीमत का बा


एतना दिल में नफरत काहे 

राम राज में चलत का बा


बात बात में लाठी गोली 

यू पी में ई होखत का बा


ए प्रदेश में पढ़ल लिखल 

माथ प अपने ढोवत का बा


खेती और किसानी वाला 

छाती पीट के रोवत का बा


खेत के गेंहूं बैल चर गइल

अउर गदहवा गावत का बा


लूट डकैती हत्या करके 

सेवक अऊरी चाहत का बा


भूखे पेट भजन करे में 

बाबा जी अब मीलत का बा


राजीव

सब छूट गइल पीछे कुछ साथ चलत नइखे

भोजपुरी 

सब छूट गइल पीछे कुछ साथ चलत नइखे
जिनगी के सफर तब्बो हमनी से कटत नइखे

जब प्यार भइल पहिला तब नौकरी ना र हे 
अब काम बा एतना की दिल प्यार करत नइखे

उनका से बिछड़ला के दुख कांट नीयर बाटे
धंसल बा करेजा में आ दर्द घटत नइखे

बचपन में बिना पइसा मेला में मजा आ वे 
अब उहे खुशी कहिंयो पइसा से मिलत नइखे

माई के फिकिर बाबू भूखे बा की खइले बा 
बाबू जी के चिन्ता की ई लईका पढ़त नइखे

मतलब के जमाना में इ हाल बा रिस्तन के 
भाई के मुसीबत में, भाई ही सटत नइखे

एक दोसरे खातिर प्रीत अब केकरे हिया में बा
ए गाछ प कवनो फल अब काहे फरत नइखे

जल भूमी हवा जंगल हर चीज के खा के भी 
हमनी के जरूरत के ई भूख मरत नइखे

राजीव कुमार

Thursday, June 30, 2022

गीत काहें मन बइठल बाटे

काहें मन बइठल बाटे 
कइसे दिल टूटल बाटे
काहें इ किस्मत आखिर 
तोहरा से रूठल बाटे 

दिल के लगा ल हमसे 
हमके चोरा हमसे 
हमरे आखीं मे दे ख 
सब कुछ बता द हमसे 
सब भुला के आजा प्यार क रे के 
जान से भी ज्यादा प्यार क रे के 

दरिया के धारा हटे
कवनो किनारा हटे
जिनगी ई जिनगी ना ह 
टूटल सितारा हटे 

रात अजोरा रही 
नश्शा भी पूरा रही 
तहार कवनो ना इंहवा 
चाहत अधूरा रही 
सब भुला के आजा प्यार क रे के 
जान से भी ज्यादा प्यार क रे के 

सांस रही जहिया ले
दुखो रही तहिया ले
केतना जी आजिज होई
अउरी होई कहिया ले 

माचिस लगा द गम के 
लगे बोलाल हम के
चाहत के सावन में अब
बिजली चमके त चमके

सब भुला के आजा प्यार क रे के 
जान से भी ज्यादा प्यार क रे के 

राजीव कुमार

Thursday, June 16, 2022

धान के रोपनी आम के मौसम घर के याद सताये ला।

भोजपुरी ग़ज़ल (बिरहा)

धान के रोपनी  आम के मौसम घर के याद सताये ला।
बिछड़ के सबसे रातो  दिन अब मनवा बिरहा गाये ला।

गांव से बाहर  निकले  खातिर सपना देखले रहनी हम।
अब जब शहर में आ गईनी त गांव के सपना आये ला।

माई  के  अंचरा  के  छाया  में  धूप   में  भी  ठंडा  लागे।
आज  मगर  ए सी  दफ्तर  में  बइठ के जी घबराये ला।

साईकिल छोड़ के कार चलावे लगनी लेकिन आजो ले।
हमरे   दिल   में  एगो   लइका  कैंची  रोज  चलाये  ला।

दोस्त संघतिया  सब  चल  गईलें  अपने अपने जीवन में।
लेकिन  अब्बो  खेले  खातिर  फिल्ड  में मनवा जाये ला।

वक्त  गुजर  जायेला  लेकिन  स्वाद  कबो  नाहीं  जाला।
भूजा  सत्तू   लिट्टी   चोखा   खाये के मन  ललचाये  ला।

दिन  भर  मस्ती  सांझ  के खेला रात के छत पे सुत्ते के।
लेकिन  अब   ई  हाल  बा  राजू  नींद के गोली खायेला।

राजीव कुमार

कैंची- बच्चे जब पहली बार अपने से बड़ी साईकिल चलाना सीखते है।

भोजपुरी ग़ज़ल की महफ़िल 
पूरा सुनने के लिए लिंक चटकायें
https://youtu.be/Xgw-izHLbzM

सच कहीं बोल दीं? बो ल ना बताव हमके

भोजपुरी ग़ज़ल

सच कहीं बोल दीं? बो ल ना बताव हमके
भेद सब खोल दीं ?बो ल ना बताव हमके

 हमरे जिनगी के कहानी के फिलम में रानी
तहरो के रोल दीं ?बो ल ना बताव हमके

सोना चांदी त ह माटी तू क ह त दिल से
तोहके हम तोल दीं? बो ल ना बताव हमके

होठ मिसरी ह तोहार जेके ग़ज़ल में अपने
चूम के घोल दीं? बो ल ना बताव हमके

दिल में तोहरे बा जवन बात ऊ पता हमके बा
तू क ह बोल दीं ?बो ल ना बताव हमके

राजीव कुमार

खतम भईल अब हमनी के

भोजपुरी गीत

खतम भईल अब हमनी के
जानेमन इन्तजार 
बहियां में तू आ गईलू त 
आ गईल बा बहार 


जब जब खुले इ अंखिया 
तब सामने तू र ह 
जब होखे यार रतिया।
सपना मे तू ही आ व 

अइसे चले ज़िन्दगी 

ए बाबू सोना बेबी 
आ जा ना प्यार करी

तोहरा से अब दूर हम होके ना जी सकम
हमरे हर इक सांस में बा नाम तोहरे सनम 

बगीया के फूल जइसे 
चंदा के रूप जइसे 
तू जिनगी मे अब र ह 
सुबह के धूप जइसे 

साथ न छूटे कभी  

ए बाबू सोना बेबी 
आ जा ना प्यार करी

दुनिया भर के खुशी तोहरा खातिर रही
हर एक पल जिन्दगी तोहरा खातिर रही
सुबह आ  शाम तोहरे
चाहत के नाम तोहरे 
अपने ही मन के ह पर 
ह दिल गुलाम तहरे 

जान *जाई* या रही 

ए बाबू सोना बेबी
आ जा ना प्यार करीं

राजीव कुमार

Monday, April 11, 2022

महब्बत क्रीमनलाईज कर रहे हैं

 हज़ल हास्य रस 😊😊🙏🙏


महब्बत क्रीमनलाईज कर रहे हैं

डकैती  मोर्डनाईज   कर  रहे  हैं  


था कल तक जुर्म लेकिन आज से हम

कीमशन लीगलाईज  कर  रहे हैं 


बचाने  वाले ही  अब  रेप करना  

मुसलसल नोर्मलाईज कर रहे हैं


खबर के  नाम पर ये न्युज चैनल 

किसी की  एडवटाईज कर रहे हैं


सफाई हाथ की जो कर चुके वो

सभी को  सेनीटाईज  कर रहे हैं।


ये  चंदा    मांगने  वाले अभी भी

हमें  डीमोनीटाईज   कर  रहे  है 


हमारी  ग्रोथ  है  गढ्ढे  में  लेकिन 

हमारे   सेठ  राईज  कर  रहे  हैं 


बस इक खेती किसानी थी हमारी 

उसे भी  प्राइवेटाईज  कर रहे हैं 


मुतास्सिर होके उससे हम भी अपना 

एडेण्डा  फाईनलाईज कर रहे हैं


बदन तो ठीक है पर अक्ल का हम

दिनों दिन हाफ साईज कर रहे है


राजीव कुमार

हर तरफ शोर है नफ़रत है तबाही है दोस्त

 हर तरफ शोर है नफ़रत है तबाही है दोस्त  

अब कहाँ इश्क़ ज़माने में बचा ही है दोस्त।


तेरे बारे में नहीं बोल रहा हूँ फिर भी 

मेरी हालत तेरे ज़ुल्मों की गवाही है दोस्त


कौन से सच की तरफ भाग रहा हूँ मैं भी

मेरे पीछे भी मेरा झूठ पङा ही है दोस्त


बात अच्छी है बुरी है नहीं मालूम मगर 

इश्क़ हर शख़्स को इक बार हुआ ही है दोस्त


इन महब्बत के सताये हुए लोगों के लिये 

दर्द  ये दर्द  नहीं है ये दवा ही है दोस्त


कैसे पायेंगे तरक़्क़ी का वो अमृत हम लोग

दिल में जब जह्र अदावत का भरा ही है दोस्त


बात इतनी है कि ईमान परस्तों के लिये।

आज का दौर भी इक सख़्त सजा ही है दोस्त


जिन्दगी एक सफर है तो मुझे लगता है 

मौत मंजिल नहीं दर अस्ल ये राही है दोस्त


जिसमें मजलूम की आवाज नहीं है शामिल

शेर वो शेर नहीं सिर्फ सियाही  है दोस्त 


राजीव कुमार



हसरत जब रुख्सार से बातें करती है

 ग़ज़ल


हसरत जब रुख्सार से बातें करती है 

बीनाई   दीदार   से   बातें  करती  है


एक यही अंदाज जुदा है बस उसका

रूठ के भी वो प्यार से बातें करती है


दो दिन घर में तन्हा रह कर जान गया

खिङकी  भी  दीवार से बातें करती है 


इश्क़ कहां होता है सच्चा जानते हो?

रूह जहां  किरदार  से बातें करती है


दरिया के तूफान से  वो  क्युं डर  जाये 

जो  कश्ती  मंझधार  से  बातें करती है


जीवन  के  इस  रेस  में हमने देखा है

मौत  सदा  रफ्तार  से  बातें  करती है


राजीव कुमार

खुश्बू का लुत्फ लीजीये मौसम के साथ साथ

खुश्बू का लुत्फ लीजीये मौसम के साथ साथ

गांधी को बात  कीजीये  गौतम के साथ साथ


अपने   हको   हकूक  को  पाना  है तो हूजूर 

आवाज  भी  उठाईये  परचम  के साथ साथ


सारे  गुलाम   बन  गये   इक्का  तो   देखना 

रोयेगा  बादशाह  भी  बेगम  के  साथ साथ


दिलवर की याद आये तो गजलो को गाईये 

जख्मों के नाम लीजीये मरहम के साथ साथ


अब तक की जिन्दगी का यही फलस्फा है के

लूडो का खेल खेलिये कैरम के साथ साथ


असलम के साथ दोस्ती राजीव की ए दोस्त

दिखती है जैसे रौशनी शबनम के साथ साथ


राजीव कुमार

ख्वाबों की डगर गम की दुकां ठीक नहीं है

 ख्वाबों की डगर गम की दुकां ठीक नहीं है 

सब कुछ है बुरा कुछ भी यहां ठीक नहीं है


उल्फत का सफर खत्म हुआ जब से हमारा

तब से ही बदन ठीक है जां ठीक नहीं है


हम ऐसों की खातिर तो जमाने में कहीं  पर

इक दिल ही ठिकाना है मकां ठीक नहीं है


उस शह्र से इस शह्र में हम आ तो गये पर 

वो सब है यहां भी जो वहां ठीक नहीं है


देखो ना उसी शख्स पे दिल अपना फिदा है।

जिस शख़्स की आंखों की जबां ठीक नहीं है


हर दिल में महब्बत की शमा ठीक है लेकिन

सीने में ये नफरत का धुआं ठीक नहीं है


राजीव जी सच बोल रहे हो तो समझ लो 

इस वक्त ये अन्दाज ए बयां ठीक नहीं है


राजीव कुमार

मून के जैसा अपना मन है

 आज विज्ञान दिवस पर बाल कविता 


मून के जैसा अपना मन है

सोर्स मगर लाईट का सन है

सन से आखिर तक है प्लूटो 

अर्थ पे ही लेकिन जीवन है


जीवन का आधार है ओ टू 

सांसों का संसार है ओ टू 

पेङ कटे तो सी ओ टू से 

हो जाता बेकार है ओ टू


बादल जब घनघोर बनेगा 

एच टू ओ हर ओर बनेगा

लेकिन परदूषण बङने से 

एच टू एस ओ फोर बनेगा


धूप सी ओ टू क्लोरोफिल से 

पेङ बनाते खाना दिल से 

फूड चेन में शेर और बकरी 

जुङे हुए  हैं इस साइकिल से


त्रीभुज आयत गोल स्कवायर

ए प्लस बी का होल स्कवायर

इस पृथ्वी की एरीया कितना 

टू पाई आर का बोल स्क्वायर


एक ही फोर्स अटल होता है 

गुरुत्वाकर्षण बल होता है।

पेङ से एप्पल गिरने वाला।

ग्रेवीटी का फल होता है


ज्ञान से ही विज्ञान बना है 

हम सबका सम्मान बना है

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई 

सबसे हिन्दुस्तान बना है


राजीव कुमार

इक दश्त की आगोश में बैठे हुए बुरांश

 इक दश्त की आगोश में बैठे हुए बुरांश

तुमको बुला रहे हैं ये खिलते हुए बुरांश


इस तौर सुर्ख रू हैं ये जंगल की वादियां ।

जैसे हों इनके बीच में जलते हुए बुरांश।


देना है क्या मिसाल लबो रुख को आपके

बतला रहे हैं आज ये हँसते हुए बुरांश


कंकङ चुभे न आपके पांवों में इस लिये  

शाखों से गिर गये हैं ये बिखरे हुए बुरांश


वादी ए नैनीताल की दिलकश जमीन पर

रक्खे हैं आप के लिये महके हुए बुरांश 


राजीव कुमार

दिल से लिब्रल हैं सख्त हो जायें?

 ग़ज़ल 


दिल से लिब्रल हैं सख्त हो जायें?

क्या करें हम भी भक्त हो जायें?


दिल की दुनिया उजाड़ कर हम भी

बोलो वहसत परस्त हो जायें ?


जैसे   मेरे   हुए   हैं   वैसे  ही 

सबके अरमान ध्वस्त हो जायें।


काम  कोई  नहीं  मगर हमसे 

लोग कहते है व्यस्त हो जायें 


ये जो दुनिया है छोङिये इसकी

आईये खुद में  मस्त हो जायें


इश्क़ वो इश्क़ ही नहीं जब तक 

बहते   आंसू  न   रक्त  हो जायें


जिसने ठुकरा दिया उसी की हम

उम्र  भर  क्युं गिरफ्त हो जायें


जितने आशिक हैं सब बने शाइर 

सारे  पौधे  दरख्त  हो  जायें


राजीव कुमार

उनको भी इस जहान की परवाह नहीं है

 ग़ज़ल 
उनको  भी  इस जहान की परवाह नहीं है 
हमको भी अपनी जान की परवाह नहीं है

नोवेल की हर हसीन कहानी में लिखा था 
आशिक  को  इम्तिहान  की परवाह नहीं है 

वो  भी  मेरे  बगैर   नहीं  जी   सकेगा  पर 
धरती  को  आसमान  की  परवाह  नहीं है

इस  तौर  मुझ को देख के मुह फेरते हैं वो 
जैसे  किसी  की  जान  की परवाह नहीं है

दिल है हसीन शाम है और मयकदा भी है 
शाइर  को  अब मकान की परवाह नहीं है

उनकी नजर को देख के लगता है हमें अब  
तीरों  को  भी  कमान  की परवाह नहीं है

जिनको लहू  से सींचा वही हमसे खफा हैं 
फूलों   को  बागबान  की   परवाह  नही है

जिन  की  जबान  बंद है क्यूँ आप उन्हीं से
कहते   हो   बेजुबान  की  परवाह  नहीं  है

दिल की करे तो आज भी कहता है जमाना
लङकी  को  खानदान  की  परवाह  नहीं है

राजीव कुमार

उनका  सलूक   ऐसा  है  जैसे  कि घरों में 
पैरों   को   पायदान   की  परवाह  नहीं  है

Thursday, January 6, 2022

हसरत जब रुख्सार से बातें करती है

ग़ज़ल

हसरत जब रुख्सार से बातें करती है 
बीनाई   दीदार   से   बातें  करती  है

एक यही अंदाज जुदा है बस उसका
रूठ के भी वो प्यार से बातें करती है

दो दिन घर में तन्हा रह कर जान गया
खिङकी  भी  दीवार से बातें करती है 

इश्क़ कहां होता है सच्चा जानते हो?
रूह जहां  किरदार  से बातें करती है

दरिया के तूफान से  वो  क्युं डर  जाये 
जो  कश्ती  मंझधार  से  बातें करती है

जीवन  के  इस  रेस  में हमने देखा है
मौत  सदा  रफ्तार  से  बातें  करती है

राजीव कुमार

पूछो न हमसे मुल्क के सदमे की बात और

पूछो न हमसे मुल्क के सदमे की बात और
साधू की बात और है गुण्डे की बात और।

जंगल मे देखना हो या पिजङे में दोस्तों     
चीते की बात और है बिल्ले की बात और।
 
कितनी भी हो चमक मगर ये सबको है पता 
सोने की बात और है कांसे की बात और। 

गांधी के कद को नापने वाले ओ बेवकूफ 
पर्वत की बात और हैं टीले की बात और।

कोई तो जा के अब भी बता दे ये बोस को
कुर्सी की बात और है ओहदे की बात और

तारीख बदलने की सनक में न भूलना 
मंजिल की बात और है रस्ते की बात और

हम इस लिये भी आपके बातों पे चुप हैं सर
कहने की बात और है करने को बात और

राजीव कुमार

जाति धरम के भाव से अब काम ना चली

भोजपुरी ग़ज़ल
जाति धरम के भाव से अब काम ना चली 
हमनी के ए  दुराव से अब काम ना चली 

अच्छा समाज एक आ दू दिन बनी ना
नेतागीरी के दाव से अब काम ना चली

हिन्दू मुसलमां सिक्ख इसाई के नाम पर
ए आपसी कटाव से अब काम ना चली 

अन्याय जुल्म हार या अवसाद के नियर
बेकार के दबाव से अब काम ना चली

सोचे नी हमहूं देख के ई मतलबी समाज
भगवान ए रचाव से अब काम ना चली

महंगाई   द्वेष  भूख   रोजगार  गरीबी 
जनता प एतना घाव से अब काम ना चली

बोली में अउर कुछ रहे करनी में अउर कुछ। 
बाबू जी ए सुभाव से अब काम ना चली
राजीव कुमार

हर तरफ शोर है नफ़रत है तबाही है दोस्त

हर तरफ शोर है नफ़रत है तबाही है दोस्त  
अब कहाँ इश्क़ ज़माने में बचा ही है दोस्त।

तेरे बारे में नहीं बोल रहा हूँ फिर भी 
मेरी हालत तेरे ज़ुल्मों की गवाही है दोस्त

कौन से सच की तरफ भाग रहा हूँ मैं भी
मेरे पीछे भी मेरा झूठ पङा ही है दोस्त

बात अच्छी है बुरी है नहीं मालूम मगर 
इश्क़ हर शख़्स को इक बार हुआ ही है दोस्त

इन महब्बत के सताये हुए लोगों के लिये 
दर्द  ये दर्द  नहीं है ये दवा ही है दोस्त

कैसे पायेंगे तरक़्क़ी का वो अमृत हम लोग
दिल में जब जह्र अदावत का भरा ही है दोस्त

बात इतनी है कि ईमान परस्तों के लिये।
आज का दौर भी इक सख़्त सजा ही है दोस्त

जिन्दगी एक सफर है तो मुझे लगता है 
मौत मंजिल नहीं दर अस्ल ये राही है दोस्त

जिसमें मजलूम की आवाज नहीं है शामिल
शेर वो शेर नहीं सिर्फ सियाही  है दोस्त 

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...