Thursday, January 6, 2022

जाति धरम के भाव से अब काम ना चली

भोजपुरी ग़ज़ल
जाति धरम के भाव से अब काम ना चली 
हमनी के ए  दुराव से अब काम ना चली 

अच्छा समाज एक आ दू दिन बनी ना
नेतागीरी के दाव से अब काम ना चली

हिन्दू मुसलमां सिक्ख इसाई के नाम पर
ए आपसी कटाव से अब काम ना चली 

अन्याय जुल्म हार या अवसाद के नियर
बेकार के दबाव से अब काम ना चली

सोचे नी हमहूं देख के ई मतलबी समाज
भगवान ए रचाव से अब काम ना चली

महंगाई   द्वेष  भूख   रोजगार  गरीबी 
जनता प एतना घाव से अब काम ना चली

बोली में अउर कुछ रहे करनी में अउर कुछ। 
बाबू जी ए सुभाव से अब काम ना चली
राजीव कुमार

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