Sunday, August 28, 2022

जिन जिन को लग रहा था कि शेरों की मौज है

जिन जिन को लग रहा था कि शेरों की मौज है
अब वो ही कह रहे हैं कि गदहों की मौज है 

इस दौर के निजाम में भक्तों की मौज है 
यानी की अब समाज में कव्वों  की मौज है

चैनल जला रहे हैं अलख राष्ट्रवाद के 
यानी कि राष्ट्रवाद से गिद्धों की मौज है

जिन से कभी मरा नही चूहा वो कोकरोच। 
हमको बता रहे हैं कि चीतों की मौज है 

हिन्दू तङप के मर गये कोविड में और ये 
भाषण में बोलते हैं कि लोगों की मौज है

आम आदमी की नौकरी खतरे में है मगर
चंदे के लूट पाट में नल्लों की मौज है

बनते हैं सारे धर्म के रक्षक बङे-बड़े 
इनके ही राज पाट में गुण्डो की मौज है

लब्बो लूबाब ये है कि इस देश में अभी। 
शेरों की बात छोङिये कुत्तों  की मौज है

शायर Rajeev कुमार क्रोधित 😡

#desh_drohi_kalicharan

No comments:

Post a Comment

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...