जिन जिन को लग रहा था कि शेरों की मौज है
अब वो ही कह रहे हैं कि गदहों की मौज है
इस दौर के निजाम में भक्तों की मौज है
यानी की अब समाज में कव्वों की मौज है
चैनल जला रहे हैं अलख राष्ट्रवाद के
यानी कि राष्ट्रवाद से गिद्धों की मौज है
जिन से कभी मरा नही चूहा वो कोकरोच।
हमको बता रहे हैं कि चीतों की मौज है
हिन्दू तङप के मर गये कोविड में और ये
भाषण में बोलते हैं कि लोगों की मौज है
आम आदमी की नौकरी खतरे में है मगर
चंदे के लूट पाट में नल्लों की मौज है
बनते हैं सारे धर्म के रक्षक बङे-बड़े
इनके ही राज पाट में गुण्डो की मौज है
लब्बो लूबाब ये है कि इस देश में अभी।
शेरों की बात छोङिये कुत्तों की मौज है
शायर Rajeev कुमार क्रोधित 😡
#desh_drohi_kalicharan
No comments:
Post a Comment