Monday, April 11, 2022

ख्वाबों की डगर गम की दुकां ठीक नहीं है

 ख्वाबों की डगर गम की दुकां ठीक नहीं है 

सब कुछ है बुरा कुछ भी यहां ठीक नहीं है


उल्फत का सफर खत्म हुआ जब से हमारा

तब से ही बदन ठीक है जां ठीक नहीं है


हम ऐसों की खातिर तो जमाने में कहीं  पर

इक दिल ही ठिकाना है मकां ठीक नहीं है


उस शह्र से इस शह्र में हम आ तो गये पर 

वो सब है यहां भी जो वहां ठीक नहीं है


देखो ना उसी शख्स पे दिल अपना फिदा है।

जिस शख़्स की आंखों की जबां ठीक नहीं है


हर दिल में महब्बत की शमा ठीक है लेकिन

सीने में ये नफरत का धुआं ठीक नहीं है


राजीव जी सच बोल रहे हो तो समझ लो 

इस वक्त ये अन्दाज ए बयां ठीक नहीं है


राजीव कुमार

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