ख्वाबों की डगर गम की दुकां ठीक नहीं है
सब कुछ है बुरा कुछ भी यहां ठीक नहीं है
उल्फत का सफर खत्म हुआ जब से हमारा
तब से ही बदन ठीक है जां ठीक नहीं है
हम ऐसों की खातिर तो जमाने में कहीं पर
इक दिल ही ठिकाना है मकां ठीक नहीं है
उस शह्र से इस शह्र में हम आ तो गये पर
वो सब है यहां भी जो वहां ठीक नहीं है
देखो ना उसी शख्स पे दिल अपना फिदा है।
जिस शख़्स की आंखों की जबां ठीक नहीं है
हर दिल में महब्बत की शमा ठीक है लेकिन
सीने में ये नफरत का धुआं ठीक नहीं है
राजीव जी सच बोल रहे हो तो समझ लो
इस वक्त ये अन्दाज ए बयां ठीक नहीं है
राजीव कुमार
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