भोजपुरी ग़ज़ल
जइसन ए देश में अब महगाई हो रहल बा।
वइसे कमाई सबके चौथाई हो रहल बा।
बरियार के त इहवा हर खून मा फ बा पर।
कमजोर आदमी से बरियाई हो रहल बा।
जिनका के न्याय चाहीं उनके पे जुल्म होता।
अइसे त पीड़िता के सुनवाई हो रहल बा।
लाठी के दम पे शासन परचार में तरक्की।
सेवा करे के बा पर ढीठाई हो रहल बा।
हालत पढ़े लिखे के अइसन बा देश में की।
लइका पढाई पढ़ के दंगाई हो रहल बा।
देखे गरीब बस्ती केहू न ए ला ओकरे।
आगे दिवार चुन के रंगाई हो रहल बा।
खेती कमाई धंधा मेहरारू के सुरक्षा।
हर काम में इहां पर ढीलाई हो रहल बा।
मुस्लिम से आज हिन्दू अइसे कटल कि जइसे।
भाई के जानी दुश्मन अब भाई हो रहल बा।
राजीव कुमार
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