Thursday, January 6, 2022

हर तरफ शोर है नफ़रत है तबाही है दोस्त

हर तरफ शोर है नफ़रत है तबाही है दोस्त  
अब कहाँ इश्क़ ज़माने में बचा ही है दोस्त।

तेरे बारे में नहीं बोल रहा हूँ फिर भी 
मेरी हालत तेरे ज़ुल्मों की गवाही है दोस्त

कौन से सच की तरफ भाग रहा हूँ मैं भी
मेरे पीछे भी मेरा झूठ पङा ही है दोस्त

बात अच्छी है बुरी है नहीं मालूम मगर 
इश्क़ हर शख़्स को इक बार हुआ ही है दोस्त

इन महब्बत के सताये हुए लोगों के लिये 
दर्द  ये दर्द  नहीं है ये दवा ही है दोस्त

कैसे पायेंगे तरक़्क़ी का वो अमृत हम लोग
दिल में जब जह्र अदावत का भरा ही है दोस्त

बात इतनी है कि ईमान परस्तों के लिये।
आज का दौर भी इक सख़्त सजा ही है दोस्त

जिन्दगी एक सफर है तो मुझे लगता है 
मौत मंजिल नहीं दर अस्ल ये राही है दोस्त

जिसमें मजलूम की आवाज नहीं है शामिल
शेर वो शेर नहीं सिर्फ सियाही  है दोस्त 

राजीव कुमार

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