पूछो न हमसे मुल्क के सदमे की बात और
साधू की बात और है गुण्डे की बात और।
जंगल मे देखना हो या पिजङे में दोस्तों
चीते की बात और है बिल्ले की बात और।
कितनी भी हो चमक मगर ये सबको है पता
सोने की बात और है कांसे की बात और।
गांधी के कद को नापने वाले ओ बेवकूफ
पर्वत की बात और हैं टीले की बात और।
कोई तो जा के अब भी बता दे ये बोस को
कुर्सी की बात और है ओहदे की बात और
तारीख बदलने की सनक में न भूलना
मंजिल की बात और है रस्ते की बात और
हम इस लिये भी आपके बातों पे चुप हैं सर
कहने की बात और है करने को बात और
राजीव कुमार
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