भोजपुरी
सब छूट गइल पीछे कुछ साथ चलत नइखे
जिनगी के सफर तब्बो हमनी से कटत नइखे
जब प्यार भइल पहिला तब नौकरी ना र हे
अब काम बा एतना की दिल प्यार करत नइखे
उनका से बिछड़ला के दुख कांट नीयर बाटे
धंसल बा करेजा में आ दर्द घटत नइखे
बचपन में बिना पइसा मेला में मजा आ वे
अब उहे खुशी कहिंयो पइसा से मिलत नइखे
माई के फिकिर बाबू भूखे बा की खइले बा
बाबू जी के चिन्ता की ई लईका पढ़त नइखे
मतलब के जमाना में इ हाल बा रिस्तन के
भाई के मुसीबत में, भाई ही सटत नइखे
एक दोसरे खातिर प्रीत अब केकरे हिया में बा
ए गाछ प कवनो फल अब काहे फरत नइखे
जल भूमी हवा जंगल हर चीज के खा के भी
हमनी के जरूरत के ई भूख मरत नइखे
राजीव कुमार
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