Monday, April 11, 2022

मून के जैसा अपना मन है

 आज विज्ञान दिवस पर बाल कविता 


मून के जैसा अपना मन है

सोर्स मगर लाईट का सन है

सन से आखिर तक है प्लूटो 

अर्थ पे ही लेकिन जीवन है


जीवन का आधार है ओ टू 

सांसों का संसार है ओ टू 

पेङ कटे तो सी ओ टू से 

हो जाता बेकार है ओ टू


बादल जब घनघोर बनेगा 

एच टू ओ हर ओर बनेगा

लेकिन परदूषण बङने से 

एच टू एस ओ फोर बनेगा


धूप सी ओ टू क्लोरोफिल से 

पेङ बनाते खाना दिल से 

फूड चेन में शेर और बकरी 

जुङे हुए  हैं इस साइकिल से


त्रीभुज आयत गोल स्कवायर

ए प्लस बी का होल स्कवायर

इस पृथ्वी की एरीया कितना 

टू पाई आर का बोल स्क्वायर


एक ही फोर्स अटल होता है 

गुरुत्वाकर्षण बल होता है।

पेङ से एप्पल गिरने वाला।

ग्रेवीटी का फल होता है


ज्ञान से ही विज्ञान बना है 

हम सबका सम्मान बना है

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई 

सबसे हिन्दुस्तान बना है


राजीव कुमार

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