भोजपुरी
उन्निस के बात छोड़ के बाइस के ओर देख
बाईस में आ के बोले लें चौबिस के ओर देख
उत्सव के साल हटे तू अमरित के बात कर
रोटी के मोह छोड़ के किसमिस के ओर देख
अन्याय जुल्म दर्द अउर मर चुकल समाज
देखे के बा त शर्म से बिल्किस के ओर देख
कब्बो त अपने झूठ के चश्मा ऊतार के
आंखी से अपने देश के मुफ्लिस के ओर देख
हमनी के हर सवाल प मी ल ता ई जवाब
मालिक के बात छोड़ के वारिस के ओर देख
सगरो अमीर लोग के बगली में डाल के
क ह ता नौजवान से पूलिस के ओर देख
नफरत के आग कहियो जरा दी समूचा देश
भाई रे धर्म जात के माचिस के ओर देख
लागता देश फिल्म ह आ प्रेम चोपड़ा
क ह तरें सूनील से नर्गिस के ओर देख
शायर R कुमार
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