ग़ज़ल
हसरत जब रुख्सार से बातें करती है
बीनाई दीदार से बातें करती है
एक यही अंदाज जुदा है बस उसका
रूठ के भी वो प्यार से बातें करती है
दो दिन घर में तन्हा रह कर जान गया
खिङकी भी दीवार से बातें करती है
इश्क़ कहां होता है सच्चा जानते हो?
रूह जहां किरदार से बातें करती है
दरिया के तूफान से वो क्युं डर जाये
जो कश्ती मंझधार से बातें करती है
जीवन के इस रेस में हमने देखा है
मौत सदा रफ्तार से बातें करती है
राजीव कुमार
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