Thursday, January 6, 2022

हसरत जब रुख्सार से बातें करती है

ग़ज़ल

हसरत जब रुख्सार से बातें करती है 
बीनाई   दीदार   से   बातें  करती  है

एक यही अंदाज जुदा है बस उसका
रूठ के भी वो प्यार से बातें करती है

दो दिन घर में तन्हा रह कर जान गया
खिङकी  भी  दीवार से बातें करती है 

इश्क़ कहां होता है सच्चा जानते हो?
रूह जहां  किरदार  से बातें करती है

दरिया के तूफान से  वो  क्युं डर  जाये 
जो  कश्ती  मंझधार  से  बातें करती है

जीवन  के  इस  रेस  में हमने देखा है
मौत  सदा  रफ्तार  से  बातें  करती है

राजीव कुमार

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