Sunday, December 31, 2023

जो अपने आप से हारे हमारे अपने हैं

साल की आखरी ग़ज़ल 🙂

जो अपने आप से हारे हमारे अपने हैं 
फलक  से टूटे सितारे  हमारे अपने हैं

फरेब  रंज   ख़सारे  हमारे   अपने  हैं
वफा   के  सारे  इदारे  हमारे अपने हैं

हम अपना दर्द किसी को नहीं बता सकते
हमारी  आंख  के  धारे हमारे अपने हैं

जहांन आप का रखिये मगर जहां के सब
हैं  जितने रिंद वो सारे हमारे अपने हैं

इसी ख्याल के चक्कर में दोनों डूब गये
के इस नदी के किनारे हमारे अपने हैं

हमें न आग का डर है न दिल के जलने का
हवा   हमारी   शरारे   हमारे   अपने हैं

जो खुश हैं उनमें कोई एक भी नहीं अपना
ये  सारे  इश्क  के  मारे  हमारे अपने हैं

राजीव कुमार

Sunday, December 24, 2023

त का भइल कि जेब से हमन के थोड़ी धन गइल

भोजपुरी ग़ज़ल 

त का भइल कि जेब से हमन के थोड़ी धन गइल
इ कम बा का कि सांझ के हमन के प्लान बन गइल

हमन के भाग खेल में ए प्रेम के बा ए तरे 
कि जइसे कैच छोड़ला के बाद एगो रन गइल

ए साकी तोहरे हाथ से शराब जब पियेनी हम
बुझाला जइसे रुह ए बदन से ओ बदन गइल

खुशी हमन के देख के दुखी बस ऊहे लोग बा
कि जेकरे गिलास में न दूगो पैग तक निमन गइल

तहार दर्द दर्द ह हमार दर्द शायरी 
कईगो शायरन में काल्ह एतने प ठन गइल

ह आज ड्राई डे इबात जइसही पता चलल
जमीन पांव से गइल आ माथ से गगन गइल

राजीव कुमार

Tuesday, December 19, 2023

हमारी दुनिया के मालिकों ने हमारी दुनिया बिगाड़ दी है

ग़ज़ल 

हमारी दुनिया के मालिकों ने हमारी दुनिया बिगाड़ दी है
कहीं पे जंगल जला रहे हैं कहीं की बस्ती उजाड़ दी है

हर एक अपने सफर में है पर हरइक सफर की नहीं है मंजिल
किसी का सहरे का रास्ता है किसी को राहे पहाड़ दी है

खुदा से मिल कर जरूर इक दिन ये पूछना है हमें ही क्युंकर
हमारी किस्मत के सारे कमरों की बंद हमको किवाड़ दी है

कोई बताये कि इस तरक्की ने हमको आखिर दिया ही क्या है
हमारे सपनों के हर शह्र ने हमारी सांसें उखाड़ दी है

गमों से लड़ना पड़ेगा तुमको हंसो कि हंसना पड़ेगा तुमको
वगरना अश्कों ने देखो कैसे तुम्हारी सूरत बिगाड़ दी है

राजीव कुमार

जे दिल से निकले ला दिल ले जाला उ मन के भाषा ह भोजपूरी

गीत ग़ज़ल -भोजपुरिया

जे दिल से निकले ला दिल ले जाला उ मन के भाषा ह भोजपूरी
सभे के नियरे   लियाए वाला  मिलन के भाषा  ह भोजपूरी 

इ शब्द नाहीं  सरूर हउवे  इ दिल के दुनिया के नूर हउवे
जे प्रेम में बा  ओ प्रेमियन के  नयन के भाषा ह भोजपूरी

सुनीं जी माई त ठीक बाड़ी मगर बबुनिया बोलाव तीया
विरह सनेशा  लिखे के इहे  सजन के भाषा ह भोजपूरी

जे प्रेम खातिर अकेले वन में धनुष उठा के भटक गइल बा
ओ राम जी के बोलाये वाला हिरन के भाषा ह भोजपूरी

इहे भिखारी   के तान हउवे    इहे हमन   के परान हउवे
इहे ह मीरा   के दर्द ई हे  किसन के भाषा   ह भोजपूरी

कबो ह फगुवा कबो ह चइता कबो ई बिरहा के धुन नियर बा
बदन के भाषा चलन के भाषा भजन के भाषा ह भोजपूरी

जुलम के आगे सवाल बन के लड़ाई ल ड़े के हौसला ह
अजाद होखला के आस के हर किरन के भाषा ह भोजपूरी

ए बाबू कौने  जिला से हउ व  विदेश में जब  इ केहू पूछे
तबे अचानक  से याद आला  वतन के भाषा ह भोजपूरी

जहां नदी के  हर एगो तट पर  निवास करेली छठी माई 
परम्परा के  ओ देश में ही   हमन के भाषा   ह भोजपूरी

राजीव कुमार

नफरत के ए दौर में जे भी गीत प्रेम के गाये ला

भोजपुरी ग़ज़ल 

नफरत  के ए  दौर में जे भी गीत प्रेम के गाये ला
घुप्प अन्हरिया रात में उहे दियरी कहीं जरावे ला

दू प्रेमी के बीच जमाना आग के दरिया हs तs का 
ये दरिया पर लोहा के पुल दिल के प्रेम बनाये ला

खूब जमाना बदलल इहंवा खूब तरक्की भइल पर
जात धरम पर हमन के केहू अभियो खूब लड़ायेला

जेतना बड़का लोग बा ऊ सब गाल बजावे ला खाली
अपने हाथ से आपन रस्ता बस मजदूर बनाये ला

जेकरे बात में दम ना होला बेमतलब के ऊहे लोग 
मंच प चढ़ के इयां उहां के नारा खूब लगाये ला

झूठ में पइसा पावर बा अब हम काहे के बोलीं सांच
अपने हाथ से आपन नटई कहांवा केहू दबाये ला

डिम्पल उनके गाल के ह ऊ भंवर नदी के जे में सब
कवि कागज के नाव में चढ़ के आपन जान बचाये ला

राजीव कुमार

Sunday, December 3, 2023

दिल में जेतना प्रेम रहे अब ओतने बड़ बिमारी बा

भोजपुरी ग़ज़ल 

दिल में जेतना प्रेम रहे अब ओतने बड़ बिमारी बा
जे  के  जान  बनवनी   ऊहे  जान  प  हमरे भारी  बा

उनसे   धोखा  खा  के बुझनी  जे  से  सच्चा प्यार रहे 
जान  बचावे   वाला   मुजरिम,  खूनी   वर्दी  धारी बा

ए दुनिया  में  आज जे  बा सब बनरे से इन्सान बनल
यानी  सबके  नाच-नचावत अभियो  एगो  मदारी  बा

एक  बगइचा  के  ई  दूगो  फूल  ह  हिन्दू मुस्लिम पर 
फूल के  जे  मसलेला   ओकरे  हाथ  में ई फुल्वारी बा

प्रेम  के जड़  जे  काटत बा तू उनके दोस्त बतावे लS
आखिर कब ई बात तू बुझ ब पेड़ के दुश्मन आरी बा

अनपढ़ हो आ पढ़ल-लिखल सब मूरख एक नियर होला
ऊहो  गदहा  गदहे  होला  जेकरा  पीठ   प   धारी बा

शहर  में  तहरे  रुपया  पइसा से धनवान कहाला लोग
लेकिन   हमरे   गांव   में  धन  के  पैमाना  खुद्दारी  बा

नाच  सिनेमा  सांझ  के  देखे  जाईं  त  बाबू  जी  पूछें 
का रे   का ह   अइसे कइसे   कहंवा के   तइयारी  बा

कविता समझ में आये न आये ई सब दिक्कत राउर ह
हमन के सर्विस चौबीस घंटा जनहित में अब जारी बा

राजीव कुमार

आप अपनी खुशी के मारे हैं

ग़ज़ल 

आप अपनी खुशी के मारे हैं
और हम बे खुदी के मारे हैं

ये जो बुझते दिये हैं महफ़िल के
ये सभी  रौशनी के मारे हैं

उनकी आंखों में कुछ तो है जिसकी
हम भी  जादूगरी के मारे हैं

हम हैं दुनिया है और हम जैसे
लोग  यायावरी के मारे हैं

शह्र ए उल्फत में जाने वाले सुन
सब वहां जिंदगी के मारे हैं 

इश्क़ की प्यास मर गयी है या
आप सब तिश्नगी के मारे हैं

दिल की बातों की किसको फुर्सत है
सब के सब नौकरी के मारे हैं 

हमको मरने का डर नहीं हम तो
यार जिन्दादिली के मारे हैं

पहले उल्फत में जीते मरते थे
आज हम शायरी के मारे हैं

राजीव कुमार

मेरी बेटी को अदविका कहना

शब्द श्रद्धांजलि 🙏 इन्दिरा प्रियदर्शिनी गांधी जी 

मेरी बेटी को अदविका कहना 
मुझको लगता है इन्दिरा कहना 

ये मोहब्बत के हक में बोलेगी
ये अजीयत की जड़ को काटेगी
ये तो बेटी किसान की है सो
ये किसानों के हक में लिक्खेगी
अपनी मिट्टी को हौसला कहना 
मुझको लगता है इन्दिरा कहना

हर मसाइल का हल बनेगी ये 
मेरे बाजू का बल बनेगी ये
अपनी मेहनत से अपनी हिम्मत से
अपने भारत का कल बनेगी ये
ऐसी चाहत को इक दुआ कहना 
मुझको लगता है इन्दिरा कहना 

अपने सर को ये जब उठायेगी 
हर मुसीबत पे मुस्कुरायेगी 
मेरा नेहरू सा कद नहीं लेकिन 
मुझको नेहरू यही बनायेगी 
इससे ज्यादा अब और क्या कहना
मुझको लगता है इन्दिरा कहना 

राजीव कुमार

छठ पर्व गीत-भोजपुरी केहू रsहे न अबके दुखी छठी माई सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई

छठ पर्व गीत-भोजपुरी 

केहू रsहे न  अबके दुखी छठी माई 
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई 

बेटा माई से मीले पहुंच जाये घर
बेटियन के न लागे कहीं कौनो डर
प्रेम सबके हिया में पले रात दिन 
सsभे आगे से आगे बढ़े रात दिन 
प्रेम के दे द अइसन जड़ी छठी माई 
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई 

कौनो दुलहिन उदासी न पावे कबो 
माई के आंख ना डबबाये कबो 
माथे सेनुर रहे हाथे कंगन सजे 
सबके अरघा में चूड़ी के खनखन रहे
सब सुहागिन के कर द धनी छठी माई 
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई

गांव महके त चमकत बजरिया मिले
सबके बहंगी में फल मूल ठेकुआ मिले
खेत खलिहान अन धन से भरल रहे
भूखे केहू  ना दुनिया में परल रहे
 पूरा कर द हर एगो कमी छठी माई 
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई

डूबे सूरज त रंगीन हो इ गगन
साफ धरती रहे साफ रहे पवन 
इहे बा कामना की निरोगी हो तन
अब उम्मीदन से भरल रहे सबके मन
सूर्य डूबी तबे त उगी छठी माई 
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई

राजीव कुमार

हिस्से में मेरे गम की कटौती भी नहीं है

ग़ज़ल

हिस्से में मेरे गम की कटौती भी नहीं है
जीने की मगर मुझको चुनौती भी नहीं है

दिल को हमारे आप न किडनैप कीजीये
इतनी हमारे पास फिरौती भी नहीं है 

इक तरफा महब्बत को निभा पायेंगे कैसे 
गंगा के लिए दिल में कठौती भी नहीं है

उस शख़्स से उल्फत है उसे चाहते हैं पर 
मिल जाय वो हमको ये मनौती भी नहीं है।

जब चाहे कोई खेले कोई तोड़ दे इसको
दिल हुस्न के मालिक की बपौती भी नहीं है

बदमाश है मगरूर है दुश्मन है सकूं का
वो शख्स मगर इतना पनौती भी नहीं है

राजीव कुमार

ठोकर न काम आयी तो कांटे बिछा गये।

ग़ज़ल 

ठोकर न काम आयी तो कांटे बिछा गये।
उनको लगा कि रेस से हमको हटा गये।

रुकने लगे कदम तो उठी दिल से ये सदा 
कुछ दूर की ही बात है मंजिल पे आ गये

कुछ भी न अपने पास था इक जान छोड़कर 
फिर भी हमारे दोस्त हमें आजमा गये

जिनको न थी उम्मीद वो भी जायेंगे कभी
धरती से ऐसे-ऐसे बहुत देवता गये

इस दौर को जब लोग लिखेंगे तो लिखेंगे 
इस दौर में भी लोग थे जो सर कटा गये

जब तक बुलंद हौसला अपना है तब तलक 
क्या लेना क्या कमाया और क्या लुटा गये

अब पूछना ही होगा हमें ख़ुद से ये सवाल
इस अहद में हम लाए गए हैं कि आ गये

इक हम हैं जिसे चाहा उसे पा नहीं सके
इक वो हैं हमें छोड़ के हर चीज़ पा गये

राजीव कुमार

Monday, October 16, 2023

बेच के दर्द कुछ कमाये ला लोग





भोजपुरी ग़ज़ल

बेच के दर्द कुछ कमाये ला 
लोग मजमा इहां लगाये ला 

दुख के मतलब ऊ जान पाये ला
जे करेजा प चोट खाये ला।

भूल कइनीं जे प्रेम में पड़नी।
सभे आखिर में ई बताये ला।

जान देहला से काम ना होई
बा बहुत लोग दिल लगाये ला

चांद मासूम ह ई मत बूझिह 
धूप से रौशनी चोराये ला

बाद पतझड़ के हर बगइचा में
फूल हर‌ रंग के फुलाये ला 

उहे जीते ला इश्क के बाजी 
चोट खा के जे मुस्कुरायेला 

राजीव कुमार

Saturday, September 9, 2023

दुनिया त मिल गइल बा मगर दर नाहीं मिलल

भोजपुरी ग़ज़ल 

दुनिया त मिल गइल बा मगर दर नाहीं मिलल
घर छोड़ला के बाद कबो घर नाही मिलल

एक दोसरा के चाह में जिनकी कटल मगर 
दिल के जमीं से प्रेम के अम्बर नाहीं मिलल

रास्ता में कींच पांक कांट सब मिलल मगर 
मंजिल हमन के आज ले मनगर नाहीं मिलल 

शोहरत के आसमान लेके का करल जा ई 
जिनगी में जब सकून के सागर नाहीं मिलल

दुनिया में ओके रुउवां कइसे जोह लेम जी 
जे आप के ही आप के भीतर नाहीं मिलल 

मुश्किल बा जीत हमरा के तब्बो लड़े के बा 
मन में त ई ना आई कि अवसर नाहीं मिलल 

ई का जुलम ना ह कि रउंवा हमरे सामने 
रो रो के ई कहेनीं कि दिलबर नाहीं मिलल 

ताकत के दम पs प्रेम मिटा दे बs जहां से 
लागत बा तोहके प्रेम के जांगर नाहीं मिलल

राजीव कुमार

Saturday, May 20, 2023

सियाह रात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

ताजा गज़ल

सियाह रात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी 
ग़म-ए-हयात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

जो दिल के दर्द लहू से ग़ज़ल में लिक्खे हैं
वो काग़ज़ात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

कभी उम्मीद कभी आरज़ू कभी चाहत 
अब इस बिसात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

ये ज़ख़्म ज़ख़्म नहीं हैं, जूनून है अपना 
इस एक बात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

सँवरना उनका और उस पर मचल के यूँ चलना
वो एहतियात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

सभी से इश्क़, सभी से वफ़ा, सभी  की  मदद
हम अपनी ज़ात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

किसी जहां में सुकूं हमको मिल नहीं सकता
सो क़ायनात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

हम ऐसे लोग जो आशिक़ हैं और शायर भी
वो इस जमात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

ख़िलाफ़ ज़ुल्म के हर बार जंग लिखने को 
कलम, दवात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

राजीव कुमार

Tuesday, May 16, 2023

सौ दुखन के बस एगो दवाई रहे

भोजपुरी - हमार माई 

सौ दुखन के बस एगो दवाई रहे 
घर के घर जे बनवलस ऊ माई रहे

पिट्ठा रिकवच आ भौरी खटाई रहे
सतुआ गर्मी में खिचड़ी में लाई रहे

माई हमरे ला रहे मगर गांव में 
दादी मौसी बुआ और ताई रहे

हर बुराई के जंजाल के काटेला 
माई भीतर के हमरे भलाई रहे

प्रेम बाबू जी के लागे छड़ी नियर 
माई खिसीयाये तब्बो मलाई रहे

अपने लइकन के पालल पढ़ावल खुशी
माई खातिर बस इहे लड़ाई रहे

बाबू जी नाही रहलन ए दुनिया में जब
बाबू जी के जगहिया प माई रहे

माई रsहे त जिनगी के हर मोड़ प
हर मुसीबत के पर्वत भी राई रहे

आज माई गइल त इ मालुम परल 
हमरे जिनगी के उहे कमाई रहे

राजीव कुमार

Thursday, March 16, 2023

पहले पहल मुसीबत हमला‌ करती है

ग़ज़ल 

पहले पहल मुसीबत हमला‌ करती है 
फिर देखो ये हिम्मत क्या क्या करती है

अपनी मेहनत से जो राह बनाते हैं
उनके आगे किस्मत सजदा करती है

चोरी चुपके इश्क किया हमने फिर भी
बात हमारी सारी दुनिया करती है

बस ये सोच के मैंने उसको माफ किया 
नफरत सिर्फ अजीयत पैदा करती है

जंगल हो या सोने की लंका यारो
आग से हर इक शय जल जाया करती है

वनवासी जो राजा बनता है उसकी
दुनिया युगों युगों तक पूजा करती है

राजीव कुमार 🙏🏻❤️

बात बात पर मुझसे रूठा करती है

बात बात पर मुझसे रूठा करती है 
फिर भी हसते हसते झगड़ा करती है

कोलेज के केन्टीन में बैठ के घंटों तक
मेरी आंख में खुद को देखा करती है

मत पूछो वो कितनी पागल है लड़की
मेरी जान का मुझसे सौदा करती है

काल सहेली को दिन भर करती है पर 
मैसेज मुझको इक्का दुक्का करती है

खामोशियां जब भी घेरती हैं मुझको
जहन में तब वो आ के हल्ला करती है

लिपट के रोने लगती है वो ये कह के
मां मेरी शादी का चर्चा करती है

ग़ज़ल वो नेमत है जो दिल की बातों को
कहने में आसानी पैदा करती है

राजीव कुमार

Tuesday, February 7, 2023

गांव के खुश्बू भूल के गर्दा शहर के फांके आइल बा

भोजपुरी ग़ज़ल 

गांव के खुश्बू भूल के गर्दा शहर के फांके आइल बा 
असली दौलत छोड़ के नकली माल कमाये आइल बा

माई के हाथ के लिट्टी चोखा सत्तू ठेकुआ छोड़ के अब
केतना लोग शहर में छुछे रोटी खाये आइल बा

खेत बगईचा इनरा पोखर महुआ गूलर सरसों धान
जब्बो आंख मुदाइल आंख में सपना इहे आइल बा।

पहिला प्यार भइल जेकरा से अब्बो गांव में बीया ऊ
लोग दवाई छोड़ के शहर  दर्द बढ़ावे आइल बा

चांद सितारा जुगनू बारिस सगरो पिंक लिफाफा में 
रख के भेजs ले बीया बुचिया डाकीया लेके आइल बा

याद त होखबे कsरी तहके सावन के पहिला बरसात। 
माई कहे दे खs धरती पर बादर घुम्मे आइल बा

मंज़िल सामने बाटे तब्बो बइठ के सोचत बानी हम 
हमरे जइसे आखिर केतना लोग इहां ले आइल बा

गांव से शsहर जाये वाली ट्रेन प चढ़ते लागेला 
आत्मा पीछे छूट गइल बा देह अकेले आइल बा

राजीव कुमार

क्या मंच से बोला है सुना करिये सामईन कवियों पे नज़र आप रखा करिये सामईन

सामईन (श्रोतागण) कृपया ध्यान दें 

क्या मंच से बोला है सुना करिये सामईन 
कवियों पे नज़र आप रखा करिये सामईन

ये चाहते हैं भूख कजा मुफ्लिसी  को भूल।
जय जय किसी की आप सदा करिये सामईन

जो शेर कह रहे है वो सब जुल्म से डर के
आखिर कहां छुपे है पता करिये सामईन

कुछ भी सुना के चल दें तो मत दाद दीजीए
उंगली उठा के इन पे हंसा करिये सामईन

अपने ही दिल की लिख रहे हैं पढ़ रहे हैं सब 
ऐसे में आप अपनी कहा करिये सामईन

लोगो का जो नहीं है वो गीतों के हैं कहां 
ये भी सवाल दिल  में रखा करिये सामईन

जिनको न कोई शर्म है न फिक्र आप की
उन साहिबे अदब से बचा करिये सामईन

जो हक में आप ही के नहीं उनपे आप भी
गर हो सके तो सख्त रहा करिये सामईन

राजीव कुमार

प्रेम हर काम से जरूरी हsप्रेम के नाम भोजपूरी हs

भोजपुरीया ग़ज़ल (प्रेम)

प्रेम  हर  काम  से  जरूरी हs
प्रेम  के   नाम  भोजपूरी   हs

माई  बाबू आ  भइया भाभी के 
प्रेम   हलुवा हs अउर पूरी हs

रूह  से  प्रेम   एगो  पूजा  हs
देह   से  प्रेम  दिल के दूरी हs

जिद प आये त प्रेम आफत हs
दिल  में  रहे त जग के नूरी हs

जे समाइल बा मन में उनके से
सबके किस्मत में काहे  दूरी हs

प्रेम  मरहम हs केहू खातिर तs
प्रेम  कांटा  हs  प्रेम  छूरी  हs

प्रेम आशिक के सगरो दौलत हs  
प्रेम शायर के  बस   मजूरी हs

काम से प्रेम होला तप बाकिर
बोस  से   प्रेम   जी  हूजूरी हs

केहू  माने   न  माने  हमनी  के  
प्रेम जिनगी के असली धूरी हs

राजीव कुमार

चोरी डकैती लूट बलात्कार देख लीं

भोजपुरी ग़ज़ल
देख लीं 😊

चोरी डकैती लूट बलात्कार देख लीं
केतना अजीब बाटे इ संसार देख लीं

टोपी जनेउ दाड़ी आ दस्तार देख लीं 
भारत में भेद भाव के हथियार देख लीं

हमनीं के हाल आईं ना सरकार देख लीं
छाती प चढ़ गईल बा एगो थार देख लीं

हारल बा जे अब उनकरो सरकार देख लीं
होखेला अइसनो भी चमत्कार देख लीं

कमजोर आदमी प राउर टेड़ बा नजर 
कहियो त ओही आंख से बरियार देख लीं

मरले बा जवन जान से उहे करत बा न्याय
बा अइसनो इहां प गुनहगार देख लीं

एतना भईल विकास कि ए देश में हूजूर
लइका हर एगो घर में बा बेकार देख लीं

माई के हाल पहिले से ज्यादा खराब बा
गंगा के एह पार से ओह पार देख लीं

पेंसिल किताब बस्ता पढ़ाई के छोड़ के
चाकू में अब लगाव तनी धार देख लीं

भगवान जी अब हाथ खड़ा कर लेले बाड़न
देखे के बा त आज के अखबार देख लीं

R kumar

प्रेम ए दुनिया में जे कsरी ई उनके ईनाम मिली

भोजपुरी ग़ज़ल 

प्रेम  ए   दुनिया   में  जे कsरी   ई   उनके  ईनाम  मिली 
जेतना   बदनामी   ऊ पइहन ओतने  उनके  नाम  मिली

प्यार करे से पहिले  ई हो  सोच  ल‌  का  अन्जाम  मिली
दिन भर  दिल  बे  चैन रही आ  रात में ना आराम मिली 

जान  के  कवनो  कीमत नइखे देह के दुनिया में बाकिर 
तब्बो  दिल के जिस्म से बेसी इश्क में तहके दाम मिली

सूरज  जइसे  उग  के  उनकर  सपना  भोर  में  कहेला 
प्रेम  के  सागर में  डुबला  के   बादे  सुन्दर  शाम मिली

एक  दूजे  के  पा  जइला  के  पागल  पन से ना पइ बा 
कहियो खुद के छोड़ के दे खs तोहरे दिल में राम मिली

दिन भर  आपन  के बोझ उठाई  रात में  रोई अपने पर 
जे-जे  आपन  प्यार  न  पाई उनका  के  ई  काम मिली

ऊहो वक्त रहे जब क्लास में बइठ के सोचीं घsरे आज 
खीर में गोला  किशमिश काजू अउर तनी बादाम मिली

मेहनत  से  जे   काम   करेला   उनकर कमवा बोले ला 
बाकी  जे नाकाम  बा तोहके उनकर जिभिया लाम मिली 

सूर   कबीर   भिखारी  ग़ालिब  ईहे  लिखले  बा सsभे।
दर्द  ग़ज़ल  में जेतना  लिख  ब ओतने ही आराम मिली

राजीव कुमार

मफलर सफारी सूट पे भारी टीशर्ट है

ग़ज़ल (मैं और मेरी टीशर्ट)

मफलर सफारी सूट पे भारी टीशर्ट है
शर्दी के  हर  दरख्त पे आरी टीशर्ट है

कांटों से भर गयें हैं जो रस्ते उन्हीं में अब
फूलों  की इक  हसीन कियारी  टीशर्ट है

सय्याद के आगे खड़े हैं अम्न के पंछी
इस बार  पंछियों  की सवारी टीशर्ट है

जो  ढा  रहे  हैं  बेबसों  पे  जुल्म  बारहा 
उन ज़ालिमों का अबके शिकारी टीशर्ट है

बैठे हैं जो बिझाये हुए जाल झूठ के
उनके लिये तो जैसे कटारी टीशर्ट है

कहता नहीं है खुद से मगर जान लिजिए
इस बार शर्दियों की  सुपारी टीशर्ट है

हर शख्स को  गले  से  लगाते हुए लगे 
चाहत  की जैसे  एक  पिटारी  टिशर्ट है

बेटी  बहन   बुजुर्ग  मां सबकी  निगाह में
कितनी  हसीन  कितनी  पियारी टिशर्ट है

नफरत की मंडियों में महब्बत की इक दुकान
यारों    हमारी   और    तुम्हारी    टीशर्ट  है

राजीव कुमार

सीधा रास्ता छोड़ के टेड़े राह चलेलन राजीव जी

भोजपुरी ग़ज़ल 

सीधा रास्ता  छोड़ के टेड़े  राह चलेलन  राजीव जी
प्रेम करेलन  दर्द  सहेलन  मस्त रहेलन  राजीव जी

जेब त खाली  बाटे बाकिर अपने दिल के दौलत से
दुनिया भर के जेब में आपन प्रेम भरेलन राजीव जी

टोका टाकी  टांग  खिंचाई अउर  सिकायत  जे करे 
रोज ए लोगन  के  छाती  पर मूंग दरेलन राजीव जी

अपना  खातिर  एक्को पल  के फुर्सत  ना रहेला पर 
दोस्त संघतियन खातिर हर पल जिये मरेलन राजीव जी

तेज त  नाहीं  सिधवा  हऊवन तब्बो का दुक काहेके
लोग  कहेला  बात-बात  में   गेम  करेलन राजीव जी

कंघी  लेके  हाथ  में  अपने  ड्रेसिंग  टेबल के  सोझा
रोज   सवेरे  खाड़ा  होके  हाथ  मलेलन  राजीव जी

फ्लैट शहर  में बाटे  तब्बो  घsर  बा  आपन गंउवे में
देख  के  फोटो  बाबू  जी के रोज कहेलन राजीव जी

बीबी जsवन कहे सब अच्छा माईयो के हर बात सही 
जइसन  हवा  बहेला ओकरे साथ बहेलन राजीव जी

खाली  अपने दर्द  लिखेला दुनिया भर के शायर लोग
आपन गम के भूल के सबके दर्द लिखेलन राजीव जी

राजीव कुमार

हमारा काम वीडीयो ,हमारा नाम वीडीयो

हर कोई रील वीडियो बनाने में लगा है 😀
वीडियो पर गीत

हमारा  काम वीडीयो 
हमारा नाम वीडीयो
हर एक पल हर इक घड़ी 
सुब्हो से शाम वीडियो
हमारा  काम वीडीयो ,हमारा नाम वीडीयो

जो बन गये तो वीडियो
जो रह गये तो वीडियो
है दिल में कुछ तो बोलिए
जो चुप रहे तो वीडियो
हमारा  काम वीडीयो ,हमारा नाम वीडीयो

हमारी राग वीडीयो
हमारी आग वीडियो
हर एक फूल तितलीयां
हर एक बाग वीडियो 
हमारा  काम वीडीयो ,हमारा नाम वीडीयो

शहर से गांव  वीडियो
ये धूप छांव वीडीयो
हर एक सीन वीडियो 
हर एक ठांव वीडियो

हमारा  काम वीडीयो ,हमारा नाम वीडीयो

बना रहे हैं वीडियो
चला रहे हैं वीडियो
हमारी रोजी रोटियां 
कमा रहे हैं वीडियो
हमारा  काम वीडीयो ,हमारा नाम वीडीयो

जो ना दिखे वो वीडियो
जो दिख गया वो वीडियो
जो बन गया तो बन गया 
जो बिक गया वो वीडियो
हमारा  काम वीडीयो ,हमारा नाम वीडीयो

राजीव कुमार

आंखों में क्यों हैं आप के दलदल कई हजार

हजल (हास्य)

आंखों में क्यों हैं आप के दलदल कई हजार 
शायद पड़े हैं गाल पर करतल कई हजार

चक्कर में इक हसीन के शायर बेरोजगार।
अब फिर रहे हैं देश में पैदल कई हजार

हमको बता रहा है वो‌ पीना हराम है 
जो पी चुका है आज तक बोतल कई हजार

बीबी से पिट गये तो कभी बोस की गाली
हम रोज ऐसे लड़ते हैं दंगल कई हजार

भगवान ऐसे भक्तों से हमको बचाईये
मंदिर से जो चुराते हैं चप्पल कई हजार 

उनका भी शुक्रिया जो नहाते नहीं हैं रोज 
पानी के साथ बच गये टावल कई हजार

जुल्फों को अपने डाई कराती है मंथली
कहते हैं जिसपे शेर ये पागल कई हजार

राजीव कुमार

ऐसा लगता था बचा लेगा मगर ले डूबा।

ले डूबा ग़ज़ल

ऐसा लगता था बचा लेगा मगर ले डूबा।
घर बचाते हुए इक शख्स शहर ले डूबा।

फिर वही रेट  वही लोन वो गिरते शेयर ।
मेरे पैसों को इसी बात का डर ले डूबा।

आपको चाहते रहने के सुकूं को साहब।
आप से दूर हो जाने का असर ले डूबा ।

आज सूरज ने शरारत भी कुछ ऐसे की।
सुब्ह उगते ही सितारों का क़मर ले डूबा।

इस हकीकत को कोई कैसे छुपा सकता है ।
जिसका फल खाया वही पेड़ बश़र ले डूबा

एक मंज़िल जिसे पाने की हसीं ख़्वाहिश में
इक अडानी को अडानी का सफ़र ले डूबा

राजीव कुमार

जियला के सगरो हमनी के आसार लूट ल

भोजपुरी ग़ज़ल 

जियला के सगरो हमनी के आसार लूट ल 
बगली में का रखल बा तू घर बार लूट ल

 मुह से  जबान पेट से आहार  लूट ल 
के  बा इंहा पs अब केहू बरियार लूट ल

बाचल बा जौनो आ वs इहो यार लूट ल
कहियो तू हमरे दिल के भी दिलदार लूट ल

एगो दोकान लूट के का  होई  सेठ जी 
जहंवा बा ई दोकान ऊ बाजार लूट ल

कबले तू बैंक लुट ब अरे जाय द मर्दे
थाना से अबकी बार जा हथियार लूट ल

हर फूल कली बाग चमन‌ रंग इंहां के
फुर्सत मिले त एक दिन फुल्वार लूट ल

तहरे प चौकिदार फिदा बाग के बा तू 
जेतना बा फल‌ ए बाग के रसदार लूट ल

राजीव कुमार

जियला - जीने का 
बगली- जेब
सगरो - सारा /पूरा 
केहू -कौन
बरियार - ताकतवर 
बाचल - बाकी है बचा है
कहियो - किसी दिन
एगो - एक 
दोकान- दुकान 
कबले - कबतक 
फुल्वार - फुल्वारी 
तहरे - तुम पर
जेतना - जितना

सबका से राम राम सभे से सलाम बा

आज के ताजा भोजपुरी ग़ज़ल 

सबका   से   राम राम  सभे  से  सलाम बा
केहू  के  हमसे  हमरो  के  केहू से काम बा

हद  से  जियादा  केहू  सराहे  त  बूझ  लs
छूरी बगल  में  बाटे  भले  मुह  में राम बा

खुश्बू    बहार    रंग    घटा    फूल   शायरी  
हर    एक    चीज  आज  ले  तोहरे  गुलाम

तू  हमसे  दूर   अउर   तहसे   दूर  रहीं  हम
अइसे  त  जान  हमनी  के जीयले हराम बा

संकोच  शरम  रिस्क  तड़प  अंत  में ह प्रेम
छो ड़s हटा व  ए  में  बहुत  ताम  झाम  बा

जिनगी लगा के इश्क में  दे ख ना का मिलल
सिग्रेट  एगो   हाथ   में  दुसरा  में  जाम  बा

जेकरे ग़ज़ल  के  पढ़ के लोग प्रेम में परल 
शायर ऊ सबके दिल में अभी ले अनाम बा

राजीव कुमार

Wednesday, January 11, 2023

चोरी डकैती लूट बलात्कार देख लीं

भोजपुरी ग़ज़ल
देख लीं 😊

चोरी डकैती लूट बलात्कार देख लीं
केतना अजीब बाटे इ संसार देख लीं

टोपी जनेउ दाड़ी आ दस्तार देख लीं 
भारत में भेद भाव के हथियार देख लीं

हमनीं के हाल आईं ना सरकार देख लीं
छाती प चढ़ गईल बा एगो थार देख लीं

हारल बा जे अब उनकरो सरकार देख लीं
होखेला अइसनो भी चमत्कार देख लीं

कमजोर आदमी प राउर टेड़ बा नजर 
कहियो त ओही आंख से बरियार देख लीं

मरले बा जवन जान से उहे करत बा न्याय
बा अइसनो इहां प गुनहगार देख लीं

एतना भईल विकास कि ए देश में हूजूर
लइका हर एगो घर में बा बेकार देख लीं

माई के हाल पहिले से ज्यादा खराब बा
गंगा के एह पार से ओह पार देख लीं

पेंसिल किताब बस्ता पढ़ाई के छोड़ के
चाकू में अब लगाव तनी धार देख लीं

भगवान जी अब हाथ खड़ा कर लेले बाड़न
देखे के बा त आज के अखबार देख लीं

R kumar

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...