Tuesday, May 16, 2023

सौ दुखन के बस एगो दवाई रहे

भोजपुरी - हमार माई 

सौ दुखन के बस एगो दवाई रहे 
घर के घर जे बनवलस ऊ माई रहे

पिट्ठा रिकवच आ भौरी खटाई रहे
सतुआ गर्मी में खिचड़ी में लाई रहे

माई हमरे ला रहे मगर गांव में 
दादी मौसी बुआ और ताई रहे

हर बुराई के जंजाल के काटेला 
माई भीतर के हमरे भलाई रहे

प्रेम बाबू जी के लागे छड़ी नियर 
माई खिसीयाये तब्बो मलाई रहे

अपने लइकन के पालल पढ़ावल खुशी
माई खातिर बस इहे लड़ाई रहे

बाबू जी नाही रहलन ए दुनिया में जब
बाबू जी के जगहिया प माई रहे

माई रsहे त जिनगी के हर मोड़ प
हर मुसीबत के पर्वत भी राई रहे

आज माई गइल त इ मालुम परल 
हमरे जिनगी के उहे कमाई रहे

राजीव कुमार

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