छठ पर्व गीत-भोजपुरी
केहू रsहे न अबके दुखी छठी माई
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई
बेटा माई से मीले पहुंच जाये घर
बेटियन के न लागे कहीं कौनो डर
प्रेम सबके हिया में पले रात दिन
सsभे आगे से आगे बढ़े रात दिन
प्रेम के दे द अइसन जड़ी छठी माई
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई
कौनो दुलहिन उदासी न पावे कबो
माई के आंख ना डबबाये कबो
माथे सेनुर रहे हाथे कंगन सजे
सबके अरघा में चूड़ी के खनखन रहे
सब सुहागिन के कर द धनी छठी माई
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई
गांव महके त चमकत बजरिया मिले
सबके बहंगी में फल मूल ठेकुआ मिले
खेत खलिहान अन धन से भरल रहे
भूखे केहू ना दुनिया में परल रहे
पूरा कर द हर एगो कमी छठी माई
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई
डूबे सूरज त रंगीन हो इ गगन
साफ धरती रहे साफ रहे पवन
इहे बा कामना की निरोगी हो तन
अब उम्मीदन से भरल रहे सबके मन
सूर्य डूबी तबे त उगी छठी माई
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment