Tuesday, December 19, 2023

हमारी दुनिया के मालिकों ने हमारी दुनिया बिगाड़ दी है

ग़ज़ल 

हमारी दुनिया के मालिकों ने हमारी दुनिया बिगाड़ दी है
कहीं पे जंगल जला रहे हैं कहीं की बस्ती उजाड़ दी है

हर एक अपने सफर में है पर हरइक सफर की नहीं है मंजिल
किसी का सहरे का रास्ता है किसी को राहे पहाड़ दी है

खुदा से मिल कर जरूर इक दिन ये पूछना है हमें ही क्युंकर
हमारी किस्मत के सारे कमरों की बंद हमको किवाड़ दी है

कोई बताये कि इस तरक्की ने हमको आखिर दिया ही क्या है
हमारे सपनों के हर शह्र ने हमारी सांसें उखाड़ दी है

गमों से लड़ना पड़ेगा तुमको हंसो कि हंसना पड़ेगा तुमको
वगरना अश्कों ने देखो कैसे तुम्हारी सूरत बिगाड़ दी है

राजीव कुमार

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