भोजपुरी ग़ज़ल
जियला के सगरो हमनी के आसार लूट ल
बगली में का रखल बा तू घर बार लूट ल
मुह से जबान पेट से आहार लूट ल
के बा इंहा पs अब केहू बरियार लूट ल
बाचल बा जौनो आ वs इहो यार लूट ल
कहियो तू हमरे दिल के भी दिलदार लूट ल
एगो दोकान लूट के का होई सेठ जी
जहंवा बा ई दोकान ऊ बाजार लूट ल
कबले तू बैंक लुट ब अरे जाय द मर्दे
थाना से अबकी बार जा हथियार लूट ल
हर फूल कली बाग चमन रंग इंहां के
फुर्सत मिले त एक दिन फुल्वार लूट ल
तहरे प चौकिदार फिदा बाग के बा तू
जेतना बा फल ए बाग के रसदार लूट ल
राजीव कुमार
जियला - जीने का
बगली- जेब
सगरो - सारा /पूरा
केहू -कौन
बरियार - ताकतवर
बाचल - बाकी है बचा है
कहियो - किसी दिन
एगो - एक
दोकान- दुकान
कबले - कबतक
फुल्वार - फुल्वारी
तहरे - तुम पर
जेतना - जितना
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