Sunday, December 3, 2023

आप अपनी खुशी के मारे हैं

ग़ज़ल 

आप अपनी खुशी के मारे हैं
और हम बे खुदी के मारे हैं

ये जो बुझते दिये हैं महफ़िल के
ये सभी  रौशनी के मारे हैं

उनकी आंखों में कुछ तो है जिसकी
हम भी  जादूगरी के मारे हैं

हम हैं दुनिया है और हम जैसे
लोग  यायावरी के मारे हैं

शह्र ए उल्फत में जाने वाले सुन
सब वहां जिंदगी के मारे हैं 

इश्क़ की प्यास मर गयी है या
आप सब तिश्नगी के मारे हैं

दिल की बातों की किसको फुर्सत है
सब के सब नौकरी के मारे हैं 

हमको मरने का डर नहीं हम तो
यार जिन्दादिली के मारे हैं

पहले उल्फत में जीते मरते थे
आज हम शायरी के मारे हैं

राजीव कुमार

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