Tuesday, February 7, 2023

आंखों में क्यों हैं आप के दलदल कई हजार

हजल (हास्य)

आंखों में क्यों हैं आप के दलदल कई हजार 
शायद पड़े हैं गाल पर करतल कई हजार

चक्कर में इक हसीन के शायर बेरोजगार।
अब फिर रहे हैं देश में पैदल कई हजार

हमको बता रहा है वो‌ पीना हराम है 
जो पी चुका है आज तक बोतल कई हजार

बीबी से पिट गये तो कभी बोस की गाली
हम रोज ऐसे लड़ते हैं दंगल कई हजार

भगवान ऐसे भक्तों से हमको बचाईये
मंदिर से जो चुराते हैं चप्पल कई हजार 

उनका भी शुक्रिया जो नहाते नहीं हैं रोज 
पानी के साथ बच गये टावल कई हजार

जुल्फों को अपने डाई कराती है मंथली
कहते हैं जिसपे शेर ये पागल कई हजार

राजीव कुमार

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