Thursday, March 16, 2023

बात बात पर मुझसे रूठा करती है

बात बात पर मुझसे रूठा करती है 
फिर भी हसते हसते झगड़ा करती है

कोलेज के केन्टीन में बैठ के घंटों तक
मेरी आंख में खुद को देखा करती है

मत पूछो वो कितनी पागल है लड़की
मेरी जान का मुझसे सौदा करती है

काल सहेली को दिन भर करती है पर 
मैसेज मुझको इक्का दुक्का करती है

खामोशियां जब भी घेरती हैं मुझको
जहन में तब वो आ के हल्ला करती है

लिपट के रोने लगती है वो ये कह के
मां मेरी शादी का चर्चा करती है

ग़ज़ल वो नेमत है जो दिल की बातों को
कहने में आसानी पैदा करती है

राजीव कुमार

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