भोजपुरी ग़ज़ल
बेच के दर्द कुछ कमाये ला
लोग मजमा इहां लगाये ला
दुख के मतलब ऊ जान पाये ला
जे करेजा प चोट खाये ला।
भूल कइनीं जे प्रेम में पड़नी।
सभे आखिर में ई बताये ला।
जान देहला से काम ना होई
बा बहुत लोग दिल लगाये ला
चांद मासूम ह ई मत बूझिह
धूप से रौशनी चोराये ला
बाद पतझड़ के हर बगइचा में
फूल हर रंग के फुलाये ला
उहे जीते ला इश्क के बाजी
चोट खा के जे मुस्कुरायेला
राजीव कुमार
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